पुलिस के अनुसार तस्करों ने गांजा परिवहन के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। आरोपी बाहर से कपड़ा फेरीवाले या स्ट्रीट वेंडर्स बनकर घूम रहे थे, जबकि उनकी मोटरसाइकिलों की पिछली सीट के नीचे विशेष धातु का कम्पार्टमेंट बनाया गया था, जिसमें गांजा छिपाकर ले जाया जा रहा था। पुलिस ने इस नई तस्करी तकनीक को समय रहते विफल कर दिया।
महासमुंद जिले के थाना बसना क्षेत्र में पुलिस ने 5 मोटरसाइकिलों में गांजा ले जा रहे आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि गांजा उड़ीसा के बालिगुड़ा और तितरी रायगढ़ा क्षेत्र से लाकर मध्यप्रदेश में खपाने की तैयारी थी। आरोपियों ने कपड़ों के ढेर के पीछे गांजा छिपाकर पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश की।
इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 247 किलोग्राम गांजा, 7 मोटरसाइकिलें, 6 मोबाइल फोन और गांजा छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए लोहे के जाले जब्त किए। महासमुंद जिले में जब्त संपत्ति की कुल कीमत 1 करोड़ 28 लाख 44 हजार रुपये आंकी गई है।
थाना कोमाखान पुलिस ने भी टेमरी जांच नाका में घेराबंदी कर एक मोटरसाइकिल से 9 किलो 60 ग्राम गांजा बरामद किया। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं एक अन्य प्रकरण में 23 किलो गांजा के साथ तीन आरोपियों को पकड़ा गया।
धमतरी जिले में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने 131.005 किलोग्राम गांजा जब्त किया। यहां तीन मोटरसाइकिलों के जरिए कपड़ा फेरीवाले बनकर तस्करी की जा रही थी। पुलिस ने दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया, जबकि एक विधि से संघर्षरत बालक के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह है, जो उड़ीसा से गांजा लाकर मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में सप्लाई करता था। आरोपी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे थे। इससे पहले भी एम्बुलेंस, केला परिवहन, मुवर्स एंड पैकर्स, ऑटो, बस और ट्रेन के जरिए गांजा तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं।
रायपुर रेंज पुलिस का कहना है कि ओडिशा सीमा से लगे अंतरराज्यीय चेक पोस्टों पर लगातार निगरानी और वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।