जैन साधु-साध्वियों के पैदल विहार की सुरक्षा के लिए अल्पसंख्यक आयोग सक्रिय, जिला प्रशासन को जारी किए निर्देश

चातुर्मास से पहले जैन साधु-साध्वियों के पैदल विहार को सुरक्षित बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए प्रशासन से विशेष सतर्कता बरतने को कहा है।

Jul 17, 2026 - 10:49
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जैन साधु-साध्वियों के पैदल विहार की सुरक्षा के लिए अल्पसंख्यक आयोग सक्रिय, जिला प्रशासन को जारी किए निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l चातुर्मास प्रारंभ होने से पहले जैन साधु-साध्वियों द्वारा विभिन्न जिलों और शहरों की ओर पैदल विहार शुरू कर दिया गया है। इस दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था करने के निर्देश जारी किए हैं।

आयोग ने यह कदम हाल के दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में पैदल विहार के दौरान हुई सड़क दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया है। आयोग का मानना है कि धार्मिक यात्राओं के दौरान साधु-साध्वियों और उनके साथ चलने वाले सेवकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

जानकारी के अनुसार, जैन समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा से मुलाकात कर चातुर्मास के दौरान पैदल विहार करने वाले साधु-साध्वियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की थी। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि विहार के दौरान उन्हें कई स्थानों पर व्यस्त राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

प्रतिनिधिमंडल की मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए आयोग ने सभी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में विहार मार्गों पर आवश्यकतानुसार पुलिस बल की तैनाती, यातायात नियंत्रण, संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी और अन्य आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है, ताकि जैन साधु-साध्वियों का पैदल विहार सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की यह धार्मिक परंपरा वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से निभाई जाती रही है, इसलिए प्रशासन को भी आवश्यक सहयोग प्रदान करना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं और साधु-साध्वियों को किसी प्रकार की असुविधा या जोखिम का सामना न करना पड़े।

आयोग ने जिला प्रशासन से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने और पुलिस विभाग के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है। इसके साथ ही सड़क मार्गों पर यातायात संचालन को व्यवस्थित रखने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है।

गौरतलब है कि चातुर्मास जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक काल माना जाता है। इस अवधि में बड़ी संख्या में जैन साधु-साध्वियां पैदल विहार करते हुए विभिन्न नगरों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए राज्य अल्पसंख्यक आयोग की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।