बेमेतरा में डबरियों का निरीक्षण, जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया बल

बेमेतरा जिले में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेमलता पद्माकर ने मनरेगा एवं VBGRAMG अभियान के तहत निर्मित डबरियों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए और हितग्राहियों को डबरियों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।

Jul 6, 2026 - 16:12
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बेमेतरा में डबरियों का निरीक्षण, जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया बल

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l बेमेतरा जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेमलता पद्माकर ने शनिवार को ग्राम पंचायत सरदा और भटगांव में मनरेगा एवं VBGRAMG अभियान के तहत निर्मित निजी एवं आजीविका डबरियों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत बेरला की मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्या ठाकुर, एपीओ नवीन साहू और कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कश्यप भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान प्रेमलता पद्माकर ने डबरी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निर्धारित मापदंड, आकार और कार्यों की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जल संरक्षण संबंधी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि डबरियां केवल वर्षा जल संग्रहण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसानों के लिए सिंचाई, पशुपालन, मछलीपालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों का मजबूत आधार भी बन रही हैं।

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि हाल ही में हुई अच्छी वर्षा के कारण अधिकांश डबरियों में पर्याप्त मात्रा में पानी का संचयन हो चुका है। इससे किसानों को खरीफ और आगामी कृषि कार्यों के लिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण की इन संरचनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।

प्रेमलता पद्माकर ने हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उन्हें डबरियों का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डबरियों में मछलीपालन, सब्जी उत्पादन और अन्य आय बढ़ाने वाली गतिविधियां शुरू कर ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत निर्मित परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को सभी जल संरचनाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने तथा डबरियों के आसपास व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने प्रत्येक घर में सोक पीट निर्माण को प्राथमिकता देने और ग्रामीणों को इसके महत्व के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार सोक पीट के माध्यम से वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा, जिससे भू-जल पुनर्भरण में वृद्धि होगी और भविष्य में जल संकट की संभावना काफी हद तक कम की जा सकेगी।

जिला पंचायत द्वारा जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न योजनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि शासन की इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और जल संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी स्थायी मजबूती मिल सके।