बारिश के साथ दिखा 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान का असर, डबरियां और नवा तरिया हुए लबालब

दुर्ग जिले में अच्छी बारिश के बाद 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान के तहत निर्मित डबरियां, नवा तरिया और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं पानी से भर गई हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि इससे जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती मिलेगी।

Jul 6, 2026 - 16:39
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बारिश के साथ दिखा 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान का असर, डबरियां और नवा तरिया हुए लबालब

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग जिले में सक्रिय मानसून के साथ ही 'मोर गांव–मोर पानी' महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में दिखाई देने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में हुई अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं लबालब भर गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों को नई मजबूती मिलने लगी है।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास और आर्थिक समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। मानसून की बारिश के बाद इन संरचनाओं में पर्याप्त जल संग्रहण होने से यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी साबित हो रहा है।

जिले में निर्मित 30 आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं 'नवा तरिया–आय के जरिया' पहल के तहत बनाए गए 112 डबरी और तालाब भी पानी से भर चुके हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षभर सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे, जिससे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि की संभावना है।

जिले में जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई से लागू विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VBGRAMG) के अंतर्गत 303 जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यों को गति दी जा रही है। इन कार्यों का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में 'मोर गांव–मोर पानी अभियान 2.0' और मनरेगा के समन्वय से जिले की 300 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के व्यापक कार्य किए गए हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में एक वित्तीय वर्ष के दौरान 55,965 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 15 परकोलेशन पॉण्ड, 834 रिचार्ज पिट, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 123 ग्राम तालाब, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 26 चेक डैम और 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया।

इन कार्यों के माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिला है। मनरेगा के तहत अब तक 33 करोड़ 91 लाख 90 हजार रुपये की मजदूरी राशि श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। प्रशासन का मानना है कि अच्छी बारिश के साथ इन जल संरचनाओं के भरने से भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी। 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान अब जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए जल सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनता जा रहा है।