अयोध्या राम मंदिर में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग, राज्यपाल को भेजा गया पत्र

छत्तीसगढ़ स्वर्ण संघर्ष समिति के संयोजक संदीप तिवारी ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को पत्र लिखकर अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय एवं संपत्ति अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाई है।

Jun 18, 2026 - 15:00
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अयोध्या राम मंदिर में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग, राज्यपाल को भेजा गया पत्र

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय एवं संपत्ति अनियमितताओं के आरोपों को लेकर छत्तीसगढ़ स्वर्ण संघर्ष समिति के संयोजक संदीप तिवारी ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

रायपुर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में संदीप तिवारी ने दावा किया है कि राम मंदिर निर्माण और उससे संबंधित बहुमूल्य सामग्री के प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

संदीप तिवारी का कहना है कि विभिन्न माध्यमों से सामने आई खबरों और चर्चाओं के आधार पर मंदिर से संबंधित सोना, चांदी, हीरे एवं अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और अब तक कथित तौर पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

उन्होंने अपने पत्र में कहा कि देश और विदेश से श्रद्धालुओं द्वारा रामलला के लिए अर्पित की गई बहुमूल्य वस्तुओं और शिलाओं के संबंध में उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनका मानना है कि इस विषय से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की शंका को दूर करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

संदीप तिवारी ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जानी चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से मामले की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा भी इस विषय पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई जा रही है। तिवारी का कहना है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए तथ्यों को सार्वजनिक करना आवश्यक है।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित ट्रस्ट, मंदिर प्रबंधन अथवा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं की गई है। आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मामले को लेकर अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यपाल कार्यालय इस मांग पर क्या कदम उठाता है और भविष्य में इस विषय पर कोई आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।