डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्र समर्पण हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा : अरुण साव

बिलासपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित व्याख्यानमाला में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने उनके राष्ट्र समर्पण, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने, सीएए लागू करने और नई शिक्षा नीति जैसे कदम डॉ. मुखर्जी के विचारों को आगे बढ़ाने वाले निर्णय हैं।

Jul 7, 2026 - 11:31
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्र समर्पण हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा : अरुण साव

UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर l बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला एवं छात्र सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए समर्पित रहा। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अरुण साव ने कहा कि लंबे समय तक राजनीतिक कारणों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को उचित स्थान नहीं मिला, जबकि उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानते हुए अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित किया। उन्होंने कहा कि कम आयु में ही डॉ. मुखर्जी ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

उन्होंने कहा कि विभाजन के दौर में डॉ. मुखर्जी ने पीड़ित और प्रताड़ित परिवारों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। संयुक्त बंगाल के प्रस्ताव का विरोध करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय हितों की रक्षा की। भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपरा को शिक्षा व्यवस्था में स्थान देने का उनका विचार आज नई शिक्षा नीति के माध्यम से साकार होता दिखाई दे रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 और कश्मीर में लागू परमिट व्यवस्था का खुलकर विरोध किया था। उनका स्पष्ट संदेश था कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान स्वीकार नहीं किए जा सकते। इसी संकल्प के साथ वे बिना अनुमति कश्मीर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में उनका निधन हो गया। उनका यह बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान की मुख्यधारा से जोड़ा। साथ ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू कर धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि ये निर्णय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और उनके संघर्ष को सच्ची श्रद्धांजलि हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, समर्पण और सेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाएं तथा विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि देश आज जिस आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसकी वैचारिक नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान राष्ट्रनायकों ने रखी थी।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, भाजपा पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। व्याख्यानमाला के माध्यम से विद्यार्थियों को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराया गया तथा उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया गया।