शास्त्रीय संगीत संरक्षण के लिए रोजगार और संगीत चिकित्सा केंद्रों की मांग, अवध सिंह ठाकुर ने उठाए अहम मुद्दे

रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता में तबलावादक अवध सिंह ठाकुर ने शास्त्रीय संगीत की वर्तमान चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने संगीत विषय में रोजगार के अवसर बढ़ाने, आकाशवाणी के मान्यता प्राप्त कलाकारों को अधिक अवसर देने और संगीत चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की मांग की।

Jul 16, 2026 - 15:42
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शास्त्रीय संगीत संरक्षण के लिए रोजगार और संगीत चिकित्सा केंद्रों की मांग, अवध सिंह ठाकुर ने उठाए अहम मुद्दे

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ तबलावादक अवध सिंह ठाकुर ने गुरुवार को रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता में शास्त्रीय संगीत की वर्तमान स्थिति, उससे जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण आधार है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन और समाज दोनों को गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।

पत्रकारवार्ता में अवध सिंह ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं के सामने रोजगार का गंभीर संकट है। उन्होंने बताया कि संगीत में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय विद्यालयों के अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अनेक प्रतिभाशाली युवा अपने क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उन्होंने शासन से स्कूलों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में संगीत विषय के नए पद सृजित करने की मांग की, ताकि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार मिल सके और संगीत शिक्षा को भी मजबूती मिले।

उन्होंने प्रसार भारती और आकाशवाणी की कार्यप्रणाली का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आकाशवाणी से मान्यता प्राप्त अनेक कलाकारों को नियमित कार्यक्रमों में अवसर नहीं मिल पाता। उनके अनुसार, वर्षों की साधना और मान्यता प्राप्त होने के बावजूद कलाकार मंच और प्रस्तुति के अवसरों से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि ऐसे कलाकारों को अधिक अवसर देकर उनकी प्रतिभा का सम्मान किया जाए।

अवध सिंह ठाकुर ने कहा कि लोककला का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है और इस दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन इसके साथ-साथ शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जानी चाहिए।

उन्होंने आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद और कुंठा जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए संगीत चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि वैज्ञानिक शोधों में भी संगीत को मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। ऐसे में अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में संगीत चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएं, जिससे लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत मिल सके।

पत्रकारवार्ता के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार खेल और योग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उसी प्रकार शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी शासन, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर कार्य करना चाहिए। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों से ही भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।