बछरूडूबा आंगनबाड़ी भवन मुक्त, बच्चों और माताओं को फिर मिलने लगीं सेवाएं

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम पंडरी स्थित बछरूडूबा आंगनबाड़ी भवन को जिला प्रशासन ने मुक्त कराकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दिया है। इसके बाद केंद्र में बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं तथा गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के लिए योजनाओं का संचालन दोबारा शुरू हो गया है।

Jun 28, 2026 - 12:43
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बछरूडूबा आंगनबाड़ी भवन मुक्त, बच्चों और माताओं को फिर मिलने लगीं सेवाएं

UNITED NEWS OF ASIA. बलरामपुर l बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए बलरामपुर जिला प्रशासन ने विकासखंड वाड्रफनगर के ग्राम पंडरी स्थित बछरूडूबा आंगनबाड़ी भवन को मुक्त कराकर दोबारा महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दिया है। भवन वापस मिलने के बाद आंगनबाड़ी केंद्र में सभी आवश्यक सेवाओं का संचालन फिर से नियमित रूप से शुरू हो गया है, जिससे क्षेत्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं को बड़ी राहत मिली है।

जिला प्रशासन की पहल के तहत आंगनबाड़ी भवन को अन्य उपयोग से मुक्त कराया गया। जांच में यह पाया गया था कि भवन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा था, जिसके कारण आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित हो रहा था। इससे बच्चों को मिलने वाला पूरक पोषण आहार, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां भी बाधित हो रही थीं।

प्रशासन ने राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से भवन को खाली कराकर विभाग को पुनः सौंप दिया। इस कार्रवाई के दौरान संबंधित पक्ष की सहमति से भवन का ताला खोला गया और विधिवत प्रक्रिया पूरी करते हुए आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन बहाल किया गया।

भवन उपलब्ध होने के बाद अब बछरूडूबा आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से पूरक पोषण आहार वितरित किया जा रहा है। साथ ही प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य जांच, पोषण संबंधी गतिविधियां तथा गर्भवती और शिशुवती माताओं को आवश्यक परामर्श एवं विभागीय योजनाओं का लाभ भी दोबारा मिलना शुरू हो गया है। इससे क्षेत्र के लाभार्थियों को पहले की तरह सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होने लगी हैं।

जिला प्रशासन का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित और प्रभावी कार्यप्रणाली अत्यंत आवश्यक है। यही कारण है कि भवन को उसके मूल उद्देश्य के लिए पुनः उपलब्ध कराना प्राथमिकता में रखा गया। प्रशासन का मानना है कि बच्चों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने से उनके भविष्य की मजबूत नींव तैयार होती है।

इस पहल से यह संदेश भी दिया गया है कि शासकीय परिसंपत्तियों का उपयोग केवल जनहित और निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसी किसी भी स्थिति पर समय रहते कार्रवाई की जाएगी, ताकि समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों और माताओं को शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहे। प्रशासन की इस पहल से क्षेत्र में आंगनबाड़ी सेवाओं का संचालन फिर से सुचारु हो गया है और लाभार्थियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।