भाजपा शासनकाल में 2024 में लगा था पहला स्मार्ट मीटर, सरकार तुरंत वापसी की घोषणा करे : कांग्रेस

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने स्मार्ट मीटर को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में पहला स्मार्ट मीटर 14 जून 2024 को भिलाई-3 स्थित CSEB कॉलोनी में भाजपा शासनकाल के दौरान लगाया गया था। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका और कंपनी चयन की प्रक्रिया भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में होने का आरोप लगाते हुए उपभोक्ताओं की मांग पर स्मार्ट मीटर वापस लेने की घोषणा करने की मांग की है।

Aug 12, 2026 - 16:33
 0  2
भाजपा शासनकाल में 2024 में लगा था पहला स्मार्ट मीटर, सरकार तुरंत वापसी की घोषणा करे : कांग्रेस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने स्मार्ट मीटर को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में पहला स्मार्ट मीटर भाजपा शासनकाल में वर्ष 2024 में लगाया गया था। उन्होंने भाजपा के उस कथित दावे पर सवाल उठाया, जिसमें स्मार्ट मीटर की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल से जोड़ने की बात कही जा रही है।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य में विद्युत उपभोक्ता के घर पहला स्मार्ट मीटर 14 जून 2024 को भिलाई-3 स्थित CSEB कॉलोनी में लगाया गया था। उन्होंने दावा किया कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने का अनुबंध, ठेका देने तथा मीटर लगाने वाली कंपनी के चयन की प्रक्रिया भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही हुई थी। कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर लागू करने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की है।

स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना तैयार की गई थी और राज्य सरकारों तथा विद्युत मंडलों से इस संबंध में सैद्धांतिक सहमति मांगी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत और बिल पर पड़ने वाले प्रभाव की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यदि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल आने की शिकायतें मिल रही हैं तो राज्य सरकार को इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि उपभोक्ताओं की इच्छा के अनुसार स्मार्ट मीटर वापस लेने की स्पष्ट घोषणा की जाए।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट मीटर को अनिवार्य नहीं बताए जाने के बाद राज्य सरकार के पास उपभोक्ताओं की मांग पर इसे वापस लेने का विकल्प होना चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

ऊर्जा प्रभार पर भी सवाल

सुशील आनंद शुक्ला ने बिजली बिल में लगाए जा रहे ऊर्जा प्रभार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के साथ उपभोक्ताओं पर लगने वाले ऊर्जा प्रभार के 11 प्रतिशत टैक्स को भी हटाया जाना चाहिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4 हजार रुपये आता है तो इसमें करीब 440 रुपये केवल ऊर्जा प्रभार टैक्स के रूप में शामिल होने का दावा किया गया है।

400 यूनिट हाफ योजना बंद करने का आरोप

कांग्रेस नेता ने 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना बंद किए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि योजना जारी रहती तो 400 यूनिट बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं को बिल में बड़ी राहत मिलती। उनके अनुसार मौजूदा दरों पर 400 यूनिट की खपत का बिल लगभग 2200 रुपये हो सकता है, जिसमें VCA और ऊर्जा प्रभार शामिल नहीं हैं। हाफ योजना लागू होने पर इसमें लगभग 1100 रुपये की छूट मिल सकती थी।

सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर, बिजली दरों और हाफ योजना बंद किए जाने के कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से स्मार्ट मीटर की व्यवस्था की समीक्षा करने, उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली बिल से जुड़े अतिरिक्त प्रभारों पर पुनर्विचार करने की मांग की।