बाल देखरेख संस्थाओं में हर बच्चे के लिए बनेगी व्यक्तिगत देखभाल योजना, शहला निगार ने दिए निर्देश

महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने मिशन वात्सल्य के तहत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रत्येक बच्चे के लिए व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पुनर्वास और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

Jul 22, 2026 - 11:22
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बाल देखरेख संस्थाओं में हर बच्चे के लिए बनेगी व्यक्तिगत देखभाल योजना, शहला निगार ने दिए निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने मिशन वात्सल्य के अंतर्गत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को बच्चों के समग्र विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि प्रत्येक बाल देखरेख संस्था में रहने वाले हर बच्चे के लिए इंडिविजुअल केयर प्लान (व्यक्तिगत देखभाल योजना) तैयार करना अनिवार्य किया जाए, ताकि उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा सके।

समीक्षा बैठक में रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग की बाल देखरेख संस्थाओं के कार्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। बैठक के दौरान बच्चों की शिक्षा, कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियों, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक बच्चे की रुचि, क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उसके सर्वांगीण विकास के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की जाए।

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक रेणुका श्रीवास्तव ने भी अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना का नियमित मूल्यांकन भी किया जाए ताकि बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, मानसिक एवं भावनात्मक विकास और कौशल प्रशिक्षण की निरंतर समीक्षा हो सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर बच्चों के पुनर्वास और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।

शहला निगार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल देखरेख संस्थाओं में बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और विकासोन्मुख वातावरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं का उद्देश्य केवल बच्चों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, भावनात्मक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक बच्चे का सर्वोत्तम हित विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।

बैठक में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं, पुनर्वास, शिक्षा और दैनिक देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी संस्थाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण और आवश्यक सुविधाएं समय पर मिल सकें।

प्रमुख सचिव ने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नियमित निरीक्षण, समय-समय पर मूल्यांकन और प्रभावी निगरानी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे बाल देखरेख संस्थाओं में संचालित योजनाओं का लगातार निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

बैठक के दौरान एजेंडा के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों और बाल देखरेख संस्थाओं के अधीक्षकों ने विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन करने तथा बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस समीक्षा बैठक में रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी तथा विभिन्न बाल देखरेख संस्थाओं के अधीक्षक उपस्थित रहे। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि व्यक्तिगत देखभाल योजना के माध्यम से प्रत्येक बच्चे की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा और उसके अनुसार शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पुनर्वास की योजनाएं लागू की जाएंगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि व्यक्तिगत देखभाल योजना की व्यवस्था लागू होने से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। इससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास के अवसर और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का बेहतर अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनका भविष्य अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकेगा।