सूरजपुर में कुपोषण और एनीमिया पर सख्ती, लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित निरीक्षण के दिए निर्देश

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिदिन आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, पोषण वाटिका विकसित करने और बाल विवाह रोकने पर विशेष जोर दिया।

Jul 22, 2026 - 11:18
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सूरजपुर में कुपोषण और एनीमिया पर सख्ती, लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित निरीक्षण के दिए निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर जिले में विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया और विभिन्न योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

बैठक में लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति, अधोसंरचना, रिक्त पदों और निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने भवनविहीन, किराए के भवनों में संचालित और जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी लेकर निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत सुविधाएं बच्चों के समुचित विकास के लिए आवश्यक हैं।

मंत्री ने मीठा शक्ति आहार, नमकीन दलिया और रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को नियमित फील्ड निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक आहार समय पर उपलब्ध हो। साथ ही पोषण ट्रैकर में नियमित जानकारी दर्ज करने और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने पर भी जोर दिया।

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कुपोषण और एनीमिया को समाप्त करने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य करते हुए सूरजपुर को कुपोषण और एनीमिया मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया।

बैठक में कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों और एनीमिक महिलाओं को दिए जा रहे लाभों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी की जाए और एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की समय पर पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को भी इस अभियान में महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर और नवा बिहान योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही महिलाओं और बच्चों के जीवन स्तर में सुधार ला सकता है।

बाल विवाह की रोकथाम को लेकर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने सरपंचों और सचिवों को विशेष प्रशिक्षण देकर बाल विवाह की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही किशोर-किशोरियों को कम उम्र में विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया।

मंत्री ने प्रत्येक घर और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में मुनगा का पौधा लगाने तथा पोषण वाटिका विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मुनगा और हरी सब्जियों का नियमित उपयोग बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता बनाए रखने, शौचालयों की नियमित सफाई और बच्चों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

लक्ष्मी राजवाड़े ने अधिकारियों से कहा कि वे प्रतिदिन कम से कम पांच आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी केंद्र नियमित रूप से संचालित हों। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल योजनाओं के संचालन का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास का आधार हैं। इसलिए सभी अधिकारी और कर्मचारी बच्चों की देखभाल अपने बच्चों की तरह जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ करें।

समीक्षा बैठक में समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सामाजिक सहायता कार्यक्रम, सुखद सहारा योजना, दिव्यांग पेंशन, दिव्यांग छात्रवृत्ति, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना तथा सहायक उपकरण वितरण जैसे कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पात्र हितग्राहियों तक सभी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए।