युवा लोक कलाकार प्रेम साहू का निधन, सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर

बालोद जिले के युवा लोक कलाकार प्रेम साहू का अचानक निधन हो गया। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। उनके निधन से सांस्कृतिक और कला जगत में शोक की लहर है।

Jun 7, 2026 - 12:52
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युवा लोक कलाकार प्रेम साहू का निधन, सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले के युवा लोक कलाकार प्रेम साहू के असामयिक निधन से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। मात्र 30 वर्ष की आयु में उनका निधन होने से परिवार, मित्रों, कला प्रेमियों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों को गहरा आघात पहुंचा है। उनकी पहचान एक सक्रिय और लोकप्रिय लोक कलाकार के रूप में थी, जिन्होंने कम समय में अपनी कला और सरल व्यक्तित्व के कारण लोगों के बीच विशेष स्थान बनाया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेम साहू, जिन्हें लोग राजू के नाम से भी जानते थे, मूल रूप से सिकोसा क्षेत्र के ग्राम कोड़ेवा के निवासी थे। वर्तमान में वे बालोद शहर के सीतानगर वार्ड में अपने परिवार के साथ निवास कर रहे थे। वे छत्तीसगढ़ी लोककला और सांस्कृतिक आयोजनों में लगातार सक्रिय रहते थे और विभिन्न मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का दिल जीतते रहे।

बताया गया कि शुक्रवार को वे किसी कार्य से कांकेर की ओर गए हुए थे। इसी दौरान गुरुर क्षेत्र पहुंचने पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद वे बेहोश होकर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही उनके माता-पिता गुरुर के लिए रवाना हुए। हालांकि रास्ते में उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे दोनों घायल हो गए। हादसे में उनकी मां को गंभीर चोटें आईं, जबकि पिता भी घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

शनिवार को प्रेम साहू का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान लाया गया, जहां परिजन, मित्र, कलाकार साथी और बड़ी संख्या में शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। घायल माता-पिता को भी एंबुलेंस के माध्यम से घर लाया गया ताकि वे अपने पुत्र के अंतिम दर्शन कर सकें। बेटे को अंतिम बार देखकर दोनों भावुक हो उठे और माहौल गमगीन हो गया।

इसके बाद रामघाट मुक्तिधाम में पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने प्रेम साहू को एक प्रतिभाशाली कलाकार, मिलनसार व्यक्तित्व और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति समर्पित युवा के रूप में याद किया।

प्रेम साहू का निधन न केवल उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि बालोद जिले के सांस्कृतिक और लोककला जगत के लिए भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है। उन्होंने अपनी प्रतिभा और समर्पण से क्षेत्र में अलग पहचान बनाई थी। उनकी प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक योगदान लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बने रहेंगे।

उनके निधन की खबर के बाद विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और कला संगठनों ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रेम साहू भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, उनकी मुस्कान और उनसे जुड़ी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।