थायराइड में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? जानिए हाइपो और हाइपर थायराइड के लिए सही डाइट
थायराइड रोग में सही खानपान बेहद महत्वपूर्ण है। हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड की स्थिति में अलग-अलग डाइट की जरूरत होती है। जानिए कौन से खाद्य पदार्थ फायदेमंद हैं और किनसे बचना चाहिए।
UNITED NEWS OF ASIA. आज के समय में थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है और बड़ी संख्या में लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। अनियमित जीवनशैली, बढ़ता तनाव, असंतुलित खानपान और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। थायराइड गर्दन के सामने स्थित एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तब हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
थायराइड के मरीजों को अक्सर खानपान को लेकर अलग-अलग सलाह मिलती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है। इसलिए हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड में डाइट का चुनाव भी अलग-अलग होना चाहिए। सही आहार न केवल बीमारी को नियंत्रित करने में मदद करता है बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी प्रदान करता है।
हाइपोथायराइड की स्थिति में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसके कारण वजन बढ़ना, थकान, कब्ज, सुस्ती और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे मरीजों को जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ और मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ वजन बढ़ाने के साथ शरीर में सूजन की समस्या भी बढ़ा सकते हैं। सोया से बने उत्पादों का अत्यधिक सेवन भी कुछ मामलों में थायराइड हार्मोन के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। वहीं पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली और शलजम जैसी सब्जियों का कच्चे रूप में अधिक सेवन नहीं करना चाहिए, हालांकि इन्हें पकाकर सीमित मात्रा में खाया जा सकता है।
दूसरी ओर हाइपरथायराइड में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है। इस स्थिति में वजन तेजी से कम होना, घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, हाथ कांपना और अत्यधिक पसीना आना जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। ऐसे मरीजों को आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए। समुद्री शैवाल, आयोडीन सप्लीमेंट और अत्यधिक आयोडीन वाले खाद्य पदार्थ स्थिति को और प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा कॉफी, एनर्जी ड्रिंक और अन्य कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए क्योंकि ये बेचैनी और हृदय गति को बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड रोगियों को अपने भोजन में साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, नट्स और बीज शामिल करने चाहिए। सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व थायराइड ग्रंथि के बेहतर कामकाज में सहायक माने जाते हैं। इसके साथ ही पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करना और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का समय पर सेवन करना भी बेहद जरूरी है। सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर थायराइड की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।