भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, दुनिया की टॉप 100 कंपनियों से बाहर हुईं भारतीय दिग्गज कंपनियां
भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते पहली बार दुनिया की टॉप 100 कंपनियों में एक भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं रही। रिलायंस, HDFC बैंक और TCS जैसी कंपनियों की वैश्विक रैंकिंग में भारी गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक संकट बाजार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. भारतीय शेयर बाजार इस समय भारी दबाव और लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। बाजार में जारी बिकवाली का असर अब वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब बाजार पूंजीकरण के आधार पर दुनिया की शीर्ष 100 कंपनियों की सूची में एक भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है। कुछ समय पहले तक रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और TCS जैसी भारतीय कंपनियां इस सूची में मजबूती से अपनी जगह बनाए हुए थीं, लेकिन मौजूदा बाजार हालात ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो कभी दुनिया की शीर्ष 100 कंपनियों में शामिल थी, अब फिसलकर 106वें स्थान पर पहुंच गई है। वहीं HDFC बैंक की रैंकिंग में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और वह अब 190वें स्थान पर पहुंच गया है। भारती एयरटेल भी 202वें स्थान तक खिसक गई है। बैंकिंग सेक्टर की अन्य बड़ी कंपनियों में ICICI बैंक और SBI की स्थिति भी कमजोर हुई है।
सबसे ज्यादा नुकसान आईटी सेक्टर को हुआ है। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS की वैश्विक रैंकिंग में भारी गिरावट देखने को मिली है। कंपनी 84वें स्थान से फिसलकर 314वें स्थान तक पहुंच गई है। वहीं Infosys भी 198वें स्थान से गिरकर 590वें स्थान पर पहुंच चुकी है। आईटी कंपनियों में आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
बाजार की कमजोरी का असर भारतीय कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा है। पहले जहां छह भारतीय कंपनियां 100 अरब डॉलर से ज्यादा मार्केट कैप वाले क्लब में शामिल थीं, अब केवल तीन कंपनियां ही इस स्तर पर बची हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और भारती एयरटेल ही अब इस सूची में शामिल हैं। TCS, ICICI बैंक और SBI जैसी कंपनियां इस क्लब से बाहर हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बाजार में गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ रहा है।
इसके अलावा कई वैश्विक ब्रोकरेज और रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय बाजार को लेकर अपना नजरिया कमजोर किया है। UBS, Morgan Stanley, JP Morgan, HSBC और Goldman Sachs जैसी एजेंसियों ने भारत के बाजार आउटलुक को डाउनग्रेड किया है। इसका असर विदेशी निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है।
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। निवेशकों को अमेरिका में सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिल रहा है, जिसके कारण भारतीय बाजार में विदेशी निवेश घट रहा है।
वहीं दूसरी ओर अमेरिका की टेक कंपनियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। Nvidia, Alphabet, Apple, Microsoft और Amazon जैसी कंपनियां वैश्विक बाजार में दबदबा बनाए हुए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर की मजबूती ने अमेरिकी कंपनियों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है, जबकि भारतीय बाजार फिलहाल दबाव में दिखाई दे रहा है।