डॉलर के मुकाबले फिर कमजोर हुआ रुपया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को रुपया 96.37 प्रति डॉलर पर खुला और हाल ही में 96.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूत मांग रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

May 19, 2026 - 17:28
 0  3
डॉलर के मुकाबले फिर कमजोर हुआ रुपया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता

UNITED NEWS OF ASIA. भारतीय मुद्रा बाजार में रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ 96.37 प्रति डॉलर पर खुला। इससे पहले सोमवार को रुपया 96.35 के स्तर पर बंद हुआ था। शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया थोड़ी मजबूती दिखाते हुए करीब 5 पैसे तक संभला, लेकिन बाजार में अब भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 96.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है, जिसने निवेशकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय रुपये में लगातार सात कारोबारी सत्रों से गिरावट देखी जा रही है। इस दौरान घरेलू मुद्रा करीब 2.2 प्रतिशत तक कमजोर हुई है। सितंबर के आखिर में ईरान से जुड़े तनाव बढ़ने के बाद रुपये में कुल मिलाकर 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार जानकारों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता है।

मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि डॉलर की मजबूत मांग और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर भारी दबाव बना रही हैं। एशियाई बाजारों में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। यही वजह है कि बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बना हुआ है।

एक बैंक के मुद्रा व्यापारी ने कहा कि डॉलर और रुपये की जोड़ी लगातार नए उच्च स्तर बना रही है। उनका मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आती या भारत में डॉलर का मजबूत प्रवाह नहीं बढ़ता, तब तक रुपये में बड़ी रिकवरी की संभावना कम दिखाई देती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दबाव का असर साफ नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान पर संभावित हमले को रोकने और बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कहे जाने के बावजूद निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर क्षेत्रीय मुद्राओं पर भी दिखाई दिया है।

इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने भी एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ाया है। निवेशकों को आशंका है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई पर इसका असर पड़ेगा।

इधर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार को ईंधन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि की। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बढ़ोतरी है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर मानी जा रही है।