जिस स्थान पर युवाओं और पर्यटकों के लिए एडवेंचर पार्क विकसित किए जाने की घोषणा की गई थी, वहां आज भी केवल ‘प्रस्तावित एडवेंचर पार्क’ का एक जर्जर बोर्ड खड़ा दिखाई देता है। धूल और मौसम की मार झेलता यह बोर्ड मानो हर दिन सिस्टम की नाकामी और अधूरे वादों की कहानी बयां करता नजर आता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यह बोर्ड अब क्षेत्र के विकास के अधूरे सपनों का प्रतीक बन चुका है।
इस मामले में सबसे बड़ी विडंबना यह बताई जा रही है कि पास ही स्थित बैकुंठपुर का झुमका डैम आज पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभर रहा है। वहां प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल से पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है और वह क्षेत्र आज पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। लेकिन मनेन्द्रगढ़–भरतपुर क्षेत्र में एडवेंचर पार्क की योजना केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले इस एडवेंचर पार्क की घोषणा बड़े उत्साह और उम्मीदों के साथ की गई थी। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और इलाके की पहचान एक नए पर्यटन स्थल के रूप में बनेगी। लेकिन समय बीतता गया और इस परियोजना पर काम शुरू ही नहीं हो पाया।
लोगों के अनुसार इन पांच वर्षों में न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही किसी प्रकार की ठोस प्रगति दिखाई दी। जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई, जिससे लोगों के मन में इस परियोजना को लेकर निराशा बढ़ती जा रही है।
अब क्षेत्र के जागरूक नागरिक और स्थानीय लोग प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि एडवेंचर पार्क के लिए बजट स्वीकृत किया गया था, तो वह आखिर कहां गया। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह योजना केवल राजनीतिक घोषणा बनकर रह गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई बार इस उम्मीद में उस स्थान तक पहुंचते हैं कि शायद निर्माण कार्य शुरू हो गया होगा, लेकिन हर बार उन्हें वही जर्जर बोर्ड और खाली जमीन ही दिखाई देती है। पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले इस क्षेत्र में यदि एडवेंचर पार्क का निर्माण होता, तो न केवल इलाके की पहचान बढ़ती बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिल सकते थे।
अब जनता का धैर्य टूटने लगा है और लोग इस योजना पर स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि घोषणाओं और शिलान्यास की राजनीति बहुत हो चुकी है, अब जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि बैकुंठपुर का झुमका डैम पर्यटन का मॉडल बन सकता है, तो मनेन्द्रगढ़–भरतपुर में एडवेंचर पार्क क्यों नहीं बन पा रहा। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर कब संज्ञान लेते हैं और क्या यह ‘प्रस्तावित’ बोर्ड कभी वास्तविक निर्माण में बदल पाएगा या नहीं।