मनेंद्रगढ़–जनकपुर मार्ग पर खटारा बसों का संचालन, ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी से यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा

मनेंद्रगढ़–जनकपुर और मनेंद्रगढ़–निवास मार्ग पर संचालित निजी बसों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई परमिट होने के बावजूद एक ही बस को चलाया जा रहा है, जिससे ओवरलोडिंग और यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। जर्जर बसों के संचालन और परिवहन विभाग की चुप्पी पर स्थानीय लोग नाराजगी जता रहे हैं।

Mar 14, 2026 - 11:58
 0  75
मनेंद्रगढ़–जनकपुर मार्ग पर खटारा बसों का संचालन, ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी से यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, कोरिया | मनेंद्रगढ़मनेंद्रगढ़–जनकपुर और मनेंद्रगढ़–निवास मार्ग पर यात्री परिवहन व्यवस्था इन दिनों गंभीर अव्यवस्था का शिकार होती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि इस मार्ग पर संचालित निजी बस सेवाएं नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रही हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। सबसे चिंता की बात यह बताई जा रही है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार परिवहन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस मार्ग पर ‘जनता सुपर’ और ‘तरभा’ नाम से चलने वाली बस सेवाओं द्वारा कई अनियमितताएं की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग द्वारा अलग-अलग समय के लिए कई परमिट जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार अलग-अलग बसों का संचालन होना चाहिए, ताकि यात्रियों को समय पर और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके। लेकिन आरोप है कि बस संचालक अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से एक ही बस को कई परमिटों के नाम पर संचालित कर रहे हैं।

जब एक ही बस को कई परमिटों के आधार पर चलाया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से उसमें यात्रियों की संख्या भी क्षमता से अधिक हो जाती है। यात्रियों का कहना है कि कई बार बसों में इतनी भीड़ होती है कि लोगों को खड़े-खड़े ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बसों में ठूंस-ठूंस कर यात्रियों को बैठाने और खड़ा करने के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसके अलावा यात्रियों की एक बड़ी शिकायत बसों के समय पर संचालन को लेकर भी है। कई परमिट होने के बावजूद निर्धारित समय पर बसों का संचालन नहीं किया जाता, जिससे यात्रियों को घंटों सड़क किनारे इंतजार करना पड़ता है। इस समस्या से छात्र, मरीज और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इस मार्ग पर 10 साल से अधिक पुरानी और जर्जर बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों की हालत इतनी खराब बताई जाती है कि कभी भी तकनीकी खराबी या ब्रेक फेल जैसी स्थिति गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। यात्रियों का कहना है कि कई बसों में सीटें टूटी हुई हैं और मेंटेनेंस की स्थिति भी बेहद खराब है।

इस पूरे मामले में परिवहन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों को इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे लोगों के मन में यह संदेह भी पैदा हो रहा है कि कहीं बस संचालकों को विभागीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा।

नागरिकों ने प्रशासन से कई सवाल उठाए हैं। क्या इन बसों की नियमित फिटनेस जांच की जा रही है? कई परमिट होने के बावजूद एक ही बस क्यों चलाई जा रही है? ओवरलोडिंग और जर्जर बसों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। अब यह देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मामले को कब संज्ञान में लेकर कार्रवाई करता है या फिर किसी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी।