पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में छह एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। गर्मी और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए खाद्य विभाग की निगरानी में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सुपुर्द किया गया था। बाद में जांच में पता चला कि कैप्सूल में भरी गैस का बड़े पैमाने पर गबन कर लिया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि 23 मार्च 2026 को खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच पहली षड्यंत्रकारी बैठक हुई थी। इसी बैठक में गैस की अवैध निकासी कर मोटी रकम कमाने की योजना बनाई गई। इसके बाद मनीष चौधरी को रायपुर की उपयुक्त एजेंसी तलाशने और सौदेबाजी की जिम्मेदारी दी गई।
26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे और छह कैप्सूल में उपलब्ध गैस का आकलन किया। अनुमान लगाया गया कि कैप्सूल में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन एलपीजी गैस मौजूद है। इसके बाद एक करोड़ रुपये की उगाही का लक्ष्य तय किया गया। बाद में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ 80 लाख रुपये में अंतिम सौदा तय हुआ।
पुलिस के मुताबिक इस सौदे में 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव, 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी के हिस्से में तय किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि सुपुर्दनामा प्रक्रिया के दौरान खाद्य विभाग के कर्मचारियों को जानबूझकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करने और कैप्सूल का वास्तविक वजन नहीं कराने के निर्देश दिए गए थे।
सुपुर्दनामे के बाद एक सप्ताह के भीतर कैप्सूल से लगभग 92 टन गैस निकाल ली गई। बाद में फर्जी पंचनामा तैयार कर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। पुलिस ने इसे आपराधिक कूटरचना और शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया है।
महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, साइंटिफिक इंटरोगेशन और दस्तावेजी जांच के आधार पर पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस ने आरोपी पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और खाद्य अधिकारी अजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।