नेशनल लोक अदालत में 7 लाख से अधिक प्रकरणों का निपटारा: “न्याय आपके द्वार” की भावना से मिला त्वरित समाधान

छत्तीसगढ़ में आयोजित नेशनल लोक अदालत में रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित प्रदेशभर के 7 लाख से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामा के आधार पर निराकरण किया गया। मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। कई मानवीय और पारिवारिक मामलों में भी त्वरित समाधान हुआ।

May 9, 2026 - 19:50
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नेशनल लोक अदालत में 7 लाख से अधिक प्रकरणों का निपटारा: “न्याय आपके द्वार” की भावना से मिला त्वरित समाधान

UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ l छत्तीसगढ़ में न्यायिक व्यवस्था को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में आयोजित नेशनल लोक अदालत के तहत इस बार रिकॉर्ड संख्या में प्रकरणों का निराकरण किया गया। रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों सहित पूरे प्रदेश में आयोजित इस लोक अदालत में 7 लाख से अधिक लंबित एवं प्री-लिटीगेशन मामलों का समाधान आपसी सहमति और राजीनामा के माध्यम से किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली से वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर के न्यायिक अधिकारियों को अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से निपटारा करने के लिए प्रेरित किया और नेशनल लोक अदालत की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

लोक अदालत के दौरान विभिन्न न्यायालयों में लंबित आपराधिक, दीवानी, पारिवारिक और बैंकिंग मामलों का त्वरित समाधान किया गया। पक्षकारों के बीच संवाद और समझौते के माध्यम से कई वर्षों से लंबित मामलों का भी निपटारा संभव हुआ, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली।

एक विशेष मानवीय पहल के तहत जिला एवं अपर सत्र न्यायालय सारंगढ़-बिलाईगढ़ में चल रहे एक प्रकरण में, एक ऐसे प्रार्थी के लिए समाधान किया गया जो चलने-फिरने में असमर्थ था और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। इस स्थिति में पैरालीगल वॉलेंटियर को उनके घर भेजकर वीडियो कॉल के माध्यम से राजीनामा की प्रक्रिया पूरी कराई गई। यह कदम “न्याय आपके द्वार” की भावना को साकार करता नजर आया।

कुटुम्ब न्यायालय रायगढ़ में भी पारिवारिक विवादों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया। न्यायाधीश विनोद देवांगन ने समझाइश और आपसी संवाद के माध्यम से तीन परिवारों को पुनः जोड़ने में सफलता प्राप्त की। इससे न केवल विवाद समाप्त हुए बल्कि टूटते पारिवारिक रिश्तों को भी नया जीवन मिला।

लोक अदालत में बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, विद्युत विभाग, बीमा कंपनियों सहित विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। अधिवक्ताओं और पक्षकारों की उपस्थिति में कई प्रकरणों का मौके पर ही निपटारा किया गया।

नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित किया कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी समझ और सहयोग से समाज में त्वरित और सरल समाधान संभव है।