मनेन्द्रगढ़: त्योहार की खुशियों पर ‘बजट’ का ग्रहण, सफाईकर्मियों के घर अंधेरा

मनेन्द्रगढ़ में नगर एवं जिला मुख्यालय से जुड़े सफाईकर्मी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पिछले 3 से 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है। होली जैसे बड़े पर्व से पहले वेतन अटकने से कर्मचारियों के परिवारों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की है।

Mar 2, 2026 - 15:28
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मनेन्द्रगढ़: त्योहार की खुशियों पर ‘बजट’ का ग्रहण, सफाईकर्मियों के घर अंधेरा

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, कोरिया | मनेन्द्रगढ़ एक ओर सरकार विकास, सुशासन और जनकल्याण के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर मनेन्द्रगढ़ जिला मुख्यालय में कार्यरत सफाईकर्मियों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार नगर क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का तीन से चार माह का वेतन अब तक लंबित है। सबसे अधिक प्रभावित वे कर्मचारी हैं, जिनकी रोज़मर्रा की जिंदगी पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर करती है।

होली जैसे बड़े और पारिवारिक पर्व से ठीक पहले वेतन न मिल पाने से कर्मचारियों के घरों में खुशी के बजाय चिंता का माहौल है। रंगों और उल्लास के इस पर्व पर जहां पूरा शहर तैयारी में जुटा है, वहीं सफाईकर्मियों के परिवार आर्थिक तंगी से जूझते नजर आ रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार अपने संबंधित विभागों और कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार केवल एक ही जवाब दिया जाता है कि “बजट नहीं आया है।” कई कर्मचारियों ने बताया कि बच्चों के लिए कपड़े खरीदना, घर का राशन लाना और त्योहार से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करना भी उनके लिए मुश्किल हो गया है।

कर्मचारियों का दर्द यह है कि वे प्रतिदिन समय पर ड्यूटी कर रहे हैं, शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रहे हैं, नालियों और सड़कों की सफाई कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें मेहनताना तक समय पर नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि शहर को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारी आज खुद बदहाली का सामना कर रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भी नाराजगी देखी जा रही है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन बजट का हवाला देकर कर्मचारियों के वेतन को टाल रहा है, जबकि अन्य आयोजनों और गैर-जरूरी मदों में खर्च लगातार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हितों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र वेतन भुगतान नहीं किया गया, तो वे कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि त्योहार से पहले वेतन न मिलना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।

वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी सवाल उठाया है कि क्या “खजाना खाली है” का तर्क केवल निचले स्तर के कर्मचारियों और मजदूरों पर ही लागू होता है। संगठनों का कहना है कि वेतन कर्मचारियों का अधिकार है, न कि कोई अनुग्रह।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों की चुप्पी से कर्मचारियों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ती जा रही है।

शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने वाले ये कर्मचारी आज खुद आर्थिक बदहाली की धूल फांकने को मजबूर हैं। होली जैसे पर्व पर जब हर घर में खुशियां बांटी जाती हैं, तब इन परिवारों के लिए त्योहार केवल एक तारीख बनकर रह गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन कब तक मौन रहेगा और कब इन कर्मचारियों के खातों में उनकी महीनों की मेहनत की कमाई पहुंचेगी। कर्मचारियों की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।