एलपीजी गबन मामले में बड़ी कार्रवाई, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक और डायरेक्टर महाराष्ट्र से गिरफ्तार
महासमुंद जिले के चर्चित एलपीजी गबन मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया है। जांच में करोड़ों रुपये के एलपीजी गबन, आपराधिक षड्यंत्र और कालाबाजारी से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. जगदीश, पटेल महासमुंद l महासमुंद जिले में सामने आए बहुचर्चित एलपीजी गबन मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। पुलिस की तकनीकी जांच और कई राज्यों में की गई दबिश के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि एलपीजी गबन की साजिश कथित रूप से 19 मार्च 2026 से ही शुरू हो गई थी। आरोप है कि जब्त एलपीजी से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा पर लेने के बाद गैस की हेराफेरी और कालाबाजारी की योजना बनाई गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि तौल प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं की गईं और फर्जी पंचनामा तैयार कर पूरे मामले को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
मामले की जांच में पुलिस ने 11 शहरों के टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), टोल प्लाजा डेटा, वित्तीय लेनदेन और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों का पता लगाया गया। चार अलग-अलग टीमों ने रायपुर, कवर्धा, पुणे, मुंबई, कोलकाता और कोल्हापुर सहित कई शहरों में लगातार दबिश दी। आखिरकार दोनों आरोपी कोल्हापुर के एक होटल में छिपे मिले, जहां स्थानीय पुलिस के सहयोग से उन्हें गिरफ्तार किया गया।
प्रकरण की शुरुआत थाना सिंघोडा में जब्त छह एलपीजी कैप्सूल ट्रकों से हुई थी। सुरक्षा कारणों से इन ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने का निर्णय लिया गया था और बाद में इन्हें ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के सुपुर्द किया गया। आरोप है कि सुपुर्दनामा मिलने के बाद ट्रकों में भरी गई गैस का दुरुपयोग किया गया और बड़ी मात्रा में एलपीजी को विभिन्न एजेंसियों और संस्थानों को बिना वैध बिल और कर प्रक्रिया के बेच दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि अप्रैल माह में सीमित मात्रा में एलपीजी खरीदने के बावजूद उससे कहीं अधिक मात्रा में गैस की बिक्री दर्शाई गई। पुलिस के अनुसार यह मामला केवल गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आपराधिक षड्यंत्र, कूट रचना, न्यास भंग और आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
इस मामले में खाद्य विभाग से जुड़े अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। अब तक अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई नए तथ्य सामने आए हैं और आने वाले दिनों में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।
महासमुंद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विवेचना जारी है और आर्थिक अपराध तथा कालाबाजारी से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आने वाले समय में इस प्रकरण से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।