केटीयू के चार शोधार्थियों का पीएचडी प्री-सबमिशन सेमिनार संपन्न, विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों का प्री-सबमिशन सेमिनार आयोजित किया गया। चार शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए, जिनकी विषय विशेषज्ञों और विभागीय शोध समिति ने समीक्षा करते हुए शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और सामाजिक उपयोगिता को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

Jul 18, 2026 - 15:53
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केटीयू के चार शोधार्थियों का पीएचडी प्री-सबमिशन सेमिनार संपन्न, विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (केटीयू) के जनसंचार शोध केंद्र में पीएचडी शोधार्थियों का प्री-सबमिशन सेमिनार आयोजित किया गया। इस अकादमिक कार्यक्रम में चार शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया। सेमिनार का उद्देश्य शोध कार्यों की अंतिम प्रस्तुति से पहले उनकी गुणवत्ता, शोध पद्धति, मौलिकता और सामाजिक उपयोगिता का मूल्यांकन करना था।

कार्यक्रम के दौरान शोधार्थी दीक्षा देशपांडे ने "बच्चों द्वारा स्मार्ट फोन पर देखी जाने वाली विषयवस्तु से उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों का समीक्षात्मक अध्ययन" विषय पर शोध प्रस्तुत किया। वहीं विनोद सावंत ने "भारतीय राजमार्गों पर चलित माध्यमों से होने वाले दृश्य-संचार के विविध आयामों का समीक्षात्मक अध्ययन" पर अपने शोध के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए।

इसके अलावा विकास कुमार ने "जनजातीय समुदायों में लोकसंचार परंपराओं का अध्ययन (छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति के विशेष संदर्भ में)" विषय पर शोध प्रस्तुत किया। वहीं सैयद आमिर मुस्तफा हाशमी ने "ए कम्पेरेटिव स्टडी ऑन बेटरमेंट ऑफ सोसायटी थ्रू कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कम्युनिकेशन: छत्तीसगढ़ एंड झारखंड" विषय पर अपने शोध कार्य की जानकारी दी।

सेमिनार में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर की मानव विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अशोक प्रधान विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सभी शोध कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए शोध पद्धति, संदर्भ सामग्री, विश्लेषण की गुणवत्ता, शोध की मौलिकता और समाजोपयोगिता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध का उद्देश्य केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि वह समाज, नीति-निर्माण और ज्ञान के विकास में भी उपयोगी योगदान दे।

विभागीय शोध समिति (डीआरसी) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मोहंती, सदस्य डॉ. आशुतोष मंडावी और डॉ. नृपेन्द्र शर्मा कुमार ने भी शोधार्थियों के प्रस्तुतिकरण की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार और परिष्कार के सुझाव दिए। उन्होंने शोधार्थियों को शोध लेखन की गुणवत्ता बढ़ाने और तथ्यों को अधिक प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष पंकज नयन पांडे तथा जनसंपर्क विभाग के डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने भी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने शोध कार्यों को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और समाजहित से जोड़ने के लिए अपने विचार साझा किए।

सेमिनार में विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक, शोधार्थी तथा छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने शोध विषयों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका शोधार्थियों ने विस्तार से उत्तर दिया। विश्वविद्यालय का यह प्री-सबमिशन सेमिनार शोध की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और शोधार्थियों को अंतिम शोध प्रबंध प्रस्तुत करने से पहले विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।