आंगनबाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप: नन्हे कदमों से सशक्त भारत की मजबूत नींव
छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र अब पोषण तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के समन्वित केंद्र बन गए हैं। BALA मॉडल के जरिए बच्चों को खेल-खेल में सीखने का नया अनुभव मिल रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राज्य में आंगनबाड़ी केंद्रों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जो अब केवल पोषण और देखभाल तक सीमित नहीं रहकर बच्चों के समग्र विकास के केंद्र बन चुके हैं। “नन्हे कदम गढ़ेंगे सशक्त भारत का भविष्य” की सोच के साथ इन केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलों में इस बदलाव की स्पष्ट झलक देखने को मिल रही है।
इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू “बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड” (BALA) मॉडल है, जिसने आंगनबाड़ी भवनों को ही एक जीवंत पाठशाला में बदल दिया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से बने आधुनिक भवनों में दीवारों, फर्श और सीढ़ियों को शिक्षण सामग्री के रूप में उपयोग किया जा रहा है। लगभग 11.69 लाख रुपये की लागत से निर्मित इन भवनों में रंग-बिरंगे चित्रों के माध्यम से बच्चों को वर्णमाला, अंक, आकृतियां, दिशाएं और स्थानीय ज्ञान सहज रूप से सिखाया जा रहा है।
धमतरी जिले में BALA मॉडल का सफल क्रियान्वयन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य शुरू किया गया, जिनमें से 51 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का आंगनबाड़ी केंद्र इस बदलाव का जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है, जहां विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीखते नजर आते हैं। दीवारों पर बने शैक्षणिक चित्र, फर्श पर रंग और आकृतियां तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह बढ़ा रहे हैं।
इन केंद्रों के निर्माण ने न केवल शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा दिया है। मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण से स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई और पलायन में कमी आई है। इस तरह आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों में अब बच्चों के लिए आकर्षक और सुरक्षित वातावरण तैयार किया गया है। आधुनिक प्ले-स्कूल की तरह सुसज्जित ये केंद्र बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। यहां बच्चों को भाषा, गणित और व्यवहारिक ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों की भी शिक्षा दी जा रही है।
इसके अलावा, ये केंद्र गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पोषण आहार, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे जागरूकता संदेश समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी आंगनबाड़ी केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाएं इन केंद्रों के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंच रही हैं।
स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी ने इन केंद्रों को और अधिक सुदृढ़ बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की प्रवृत्ति में सुधार हुआ है।
आंगनबाड़ी केंद्रों का यह नया स्वरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीन पर साकार कर रहा है। यह पहल न केवल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही है, बल्कि एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।