छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधार के लिए शिक्षा विभाग की प्रभावी पहल, छात्रों में बढ़ा आत्मविश्वास

छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधार के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। नियमित टेस्ट, प्री-बोर्ड, काउंसलिंग और डिजिटल लर्निंग जैसे उपायों से विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

Apr 29, 2026 - 17:45
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छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधार के लिए शिक्षा विभाग की प्रभावी पहल, छात्रों में बढ़ा आत्मविश्वास

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राज्य में दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लगातार ठोस और योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है, जहां विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सकारात्मक बदलाव के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

शिक्षा विभाग ने इस दिशा में बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया। यह विद्यार्थियों के मनोबल को बढ़ाने और परीक्षा को लेकर उनके दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।

स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव द्वारा संभाग स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित कर अधिकारियों और प्राचार्यों को स्पष्ट लक्ष्य दिए गए। इन बैठकों में परीक्षा परिणाम सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, सभी जिलों के प्राचार्यों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सीधे संवाद और त्वरित समस्या समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखने के लिए साप्ताहिक और मासिक टेस्ट नियमित रूप से आयोजित किए गए। इन टेस्टों के परिणामों की समीक्षा कर छात्रों की कमजोरियों को चिन्हित किया गया और सुधारात्मक कदम उठाए गए। इसके अलावा, पालक-शिक्षक बैठक (PTM) के माध्यम से अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और अनुशासन पर बेहतर निगरानी संभव हो सकी।

पहली बार ब्लू प्रिंट आधारित प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित की गई, जिससे छात्रों को वास्तविक परीक्षा का अनुभव मिला। प्री-बोर्ड के परिणामों का विश्लेषण कर कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं संचालित की गईं। इसके साथ ही शिक्षकों को प्रश्नपत्र के ब्लू प्रिंट का प्रशिक्षण दिया गया और विद्यार्थियों को परीक्षा पैटर्न से परिचित कराया गया।

परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए काउंसलिंग सत्र और मोटिवेशनल वर्कशॉप भी आयोजित की गईं। विशेषज्ञों द्वारा छात्रों को समय प्रबंधन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन बनाए रखने के टिप्स दिए गए, जिससे परीक्षा के भय को कम करने में मदद मिली।

शिक्षा विभाग ने डिजिटल माध्यमों का भी प्रभावी उपयोग किया है। पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा, प्रत्येक जिले में स्थानीय जरूरतों के अनुसार “मिशन 90 प्लस”, “मिशन उत्कर्ष” और “मिशन संकल्प” जैसे नवाचार अभियान चलाए गए।

शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य स्तर पर युक्तियुक्तकरण कर आवश्यक पदस्थापन सुनिश्चित किया गया। साथ ही, पूर्व वर्षों के टॉपर विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं दिखाकर छात्रों को बेहतर उत्तर लेखन और प्रस्तुतीकरण के लिए प्रेरित किया गया।

इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है और वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षाओं का सामना कर रहे हैं। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी कदम साबित हो रही है, जो आने वाले समय में और बेहतर परिणाम देने की उम्मीद जगाती है।