कबीरधाम के 32 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को 22.05 करोड़ का भुगतान, लक्ष्य से अधिक हुआ संग्रहण

कबीरधाम जिले में वर्ष 2026 के तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र में 100.34 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज करते हुए 40,234 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया। 32 हजार से अधिक संग्राहकों के खातों में अब तक 22.05 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया जा चुका है।

Jul 17, 2026 - 17:53
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कबीरधाम के 32 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को 22.05 करोड़ का भुगतान, लक्ष्य से अधिक हुआ संग्रहण

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l कबीरधाम जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हजारों वनाश्रित परिवारों को इस वर्ष बड़ी आर्थिक राहत मिली है। वर्ष 2026 के तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र में जिले ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक 100.34 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करते हुए 40 हजार 234 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया है। संग्रहण कार्य में 32 हजार से अधिक संग्राहकों ने भागीदारी निभाई, जिनके खातों में अब तक 22 करोड़ 5 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया जा चुका है। इससे वनांचल क्षेत्रों के परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 5,500 रुपये का पारिश्रमिक दिया जा रहा है, जिसे देश में सर्वाधिक माना जा रहा है। बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर का सीधा लाभ कबीरधाम जिले के हजारों संग्राहकों को मिल रहा है। समय पर भुगतान होने से वनवासी परिवारों को खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिल रही है।

जिला लघु वनोपज सहकारी संघ कवर्धा के अंतर्गत 19 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के 24 लॉटों में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अधिकारियों के अनुसार लक्ष्य से अधिक संग्रहण जिले के संग्राहकों की सक्रिय भागीदारी और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है। इससे न केवल वनोपज संग्रहण को बढ़ावा मिला है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

वनांचल ग्राम लोखन की निवासी नंदनी मरावी उन हजारों संग्राहकों में शामिल हैं, जिनके परिवार की आय में तेंदूपत्ता संग्रहण से उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके परिवार के पास लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि है, जहां धान और चना की खेती की जाती है। इसके अलावा वनाधिकार पट्टे के तहत मिली एक एकड़ भूमि पर भी खेती की जा रही है। परिवार को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और मनरेगा जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।

नंदनी मरावी बताती हैं कि तेंदूपत्ता संग्रहण का मौसम शुरू होते ही पूरा परिवार इस कार्य में जुट जाता है। पहले मेहनत के अनुपात में आय कम होती थी, लेकिन अब प्रति मानक बोरा 5,500 रुपये मिलने से आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। इस आय से खेती के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदी जाती है। साथ ही बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतें भी आसानी से पूरी हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर ने वनवासी परिवारों की मेहनत को उचित सम्मान दिया है। उनके अनुसार तेंदूपत्ता संग्रहण अब केवल मौसमी रोजगार नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुका है। जिले में लक्ष्य से अधिक संग्रहण और समय पर पारिश्रमिक भुगतान यह दर्शाता है कि तेंदूपत्ता संग्रहण वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।