छत्तीसगढ़ बीज निगम का कामकाज ठप, मांगों को लेकर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के कारण बीज भंडारण, लोडिंग-अनलोडिंग और किसानों तक बीज पहुंचाने का कार्य प्रभावित हो रहा है।

May 8, 2026 - 12:39
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छत्तीसगढ़ बीज निगम का कामकाज ठप, मांगों को लेकर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर 7 मई से रायपुर के तूता मैदान में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों के आंदोलन का असर अब निगम के कामकाज पर साफ दिखाई देने लगा है। बीज भंडारण, रखरखाव, लोडिंग-अनलोडिंग और किसानों तक बीज पहुंचाने की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे कृषि कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में प्रदेशभर के कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। संघ ने बताया कि प्रदेश में 200 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी बीज निगम में कार्यरत हैं और निगम का अधिकांश कार्य इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे संचालित होता है।

कर्मचारियों की पहली मांग श्रम सम्मान निधि से जुड़ी हुई है। संघ का कहना है कि शेष जिला कार्यालयों, प्रक्रिया केंद्रों और प्रक्षेत्रों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 1 अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक की श्रम सम्मान निधि की एरियर्स राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराई जाए। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से उन्हें हर माह 4000 रुपये की श्रम सम्मान निधि दी जा रही थी, लेकिन बिना किसी लिखित आदेश या प्रशासनिक निर्देश के इस राशि का भुगतान रोक दिया गया।

दूसरी मांग निगम में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की आकस्मिक मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार सहायता राशि प्रदान करने से संबंधित है। संघ ने स्वर्गीय विनय कुमार निर्मलकर के परिवार को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से निगम के लिए कार्य करने वाले कर्मचारियों के परिवारों को संकट की स्थिति में किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलती, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

संघ ने निगम के प्रबंध संचालक (एमडी) पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार ज्ञापन और मांग पत्र सौंपे जाने के बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। जब भुगतान रोकने के संबंध में जानकारी मांगी गई, तब भी प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

कर्मचारियों ने कहा कि निगम में स्थायी अधिकारियों की कमी है और कई पद कृषि विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों द्वारा संभाले जा रहे हैं। इसके बावजूद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के श्रम और योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि निगम का अधिकांश कार्य इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे चलता है।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया और प्रबंधन का रवैया नहीं बदला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि हड़ताल से उत्पन्न स्थिति की पूरी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन की होगी।