UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l जिले के छुरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पाटसिवनी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान विधायक रोहित साहू के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधायक के कथित अभद्र बयान से नाराज पटवारी संघ तहसील शाखा छूरा ने सुशासन तिहार 2026 के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। इस मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, 5 मई को ग्राम पाटसिवनी में सुशासन तिहार के तहत जनसभा आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक एवं राजिम विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 54 के विधायक रोहित साहू भी मौजूद थे। सभा के दौरान एक मौखिक शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने मंच से पटवारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। आरोप है कि विधायक ने अपने संबोधन में पटवारियों को “जूता-चप्पल से मारने” जैसी बात कही। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस बयान का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ने लगा।
विधायक के बयान से नाराज राजस्व पटवारी संघ तहसील शाखा छूरा ने इसे अपमानजनक बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संघ ने लिखित ज्ञापन जारी कर विधायक के बयान की घोर निंदा की है। ज्ञापन में कहा गया है कि सार्वजनिक मंच से इस प्रकार की भाषा का प्रयोग राजस्व विभाग के कर्मचारियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।
पटवारी संघ ने कहा कि विधायक का यह बयान न केवल अमर्यादित है, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल को भी प्रभावित करने वाला है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पटवारी शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघ द्वारा जारी ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तहसील शाखा छूरा के समस्त पटवारी विधायक रोहित साहू के बयान की निंदा करते हुए “सुशासन तिहार 2026” का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। पटवारियों ने प्रशासन और शासन से भी इस मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।
इस पूरे मामले के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग विधायक के बयान को अनुचित बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे जनभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि विधायक की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पटवारी संघ का कहना है कि यदि भविष्य में भी कर्मचारियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयान दिए जाते रहे, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। संघ ने शासन से कर्मचारियों के सम्मान और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल इस विवाद ने सुशासन तिहार कार्यक्रम की चर्चा के बीच नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।