धरना स्थल पर पहुंचे सरपंचों ने पंचायतों में लंबित विकास कार्यों को शीघ्र स्वीकृति देने, आवश्यक निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने और लंबित राशि जारी करने की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। सरपंचों का कहना है कि लंबे समय से पंचायतों के प्रस्ताव और विकास कार्यों की फाइलें लंबित पड़ी हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सरपंच संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों से मनरेगा के तहत किसी भी बड़े निर्माण कार्य, पुल-पुलिया या अन्य विकास योजनाओं को स्वीकृति नहीं मिली है। इसके चलते पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और ग्रामीणों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि गांवों में आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई कार्य अधूरे पड़े हैं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
धरना प्रदर्शन में शामिल पवन यादव, तूलेश्वरी माझी, परमानंद नागेश, विश्वजीत ठाकुर, ठुकेलश धुर्वा और छायासन सोनवानी सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन पर पंचायतों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से चर्चा और मांग पत्र सौंपने के बावजूद कार्य स्वीकृति को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।
सरपंचों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायतों को समय पर राशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। कई योजनाओं का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है, जिससे पंचायतों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि “सुशासन तिहार” का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों की ही समस्याएं नहीं सुनी जा रही हैं। उनका कहना है कि जब पंचायतों की मूलभूत मांगों पर कार्रवाई नहीं हो रही, तब ऐसे कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने चेतावनी दी कि यदि आने वाले सप्ताह में पंचायतों के निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी गई और लंबित मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि गांवों के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को गंभीरता दिखानी होगी।
धरने के चलते जनपद पंचायत परिसर में दिनभर हलचल बनी रही और पंचायत प्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।