कसौंदा में स्टॉप डेम निर्माण में अनियमितता का आरोप, घटिया सामग्री उपयोग करने की शिकायत

गुण्डरदेही ब्लॉक के ग्राम पंचायत कसौंदा में बन रहे स्टॉप डेम निर्माण में भारी अनियमितता और घटिया सामग्री उपयोग करने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे पहली बारिश में डेम क्षतिग्रस्त होने की आशंका है।

May 8, 2026 - 11:30
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कसौंदा में स्टॉप डेम निर्माण में अनियमितता का आरोप, घटिया सामग्री उपयोग करने की शिकायत

UNITED NEWS OF ASIA. लीलाधर साहू, बालोद/गुण्डरदेही। गुण्डरदेही ब्लॉक के ग्राम पंचायत कसौंदा में नाला पर बनाए जा रहे स्टॉप डेम निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि डेम निर्माण में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इससे निर्माणाधीन डेम के पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार डेम के बेस कांक्रीटीकरण कार्य में तय मानक से काफी कम मात्रा में सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और मजबूती का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि ढलाई के बाद आवश्यक तराई (क्योरिंग) तक नहीं की जा रही, जबकि किसी भी कांक्रीट निर्माण को मजबूत बनाने के लिए तराई बेहद जरूरी होती है। इसके अभाव में निर्माण कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जल संरक्षण के उद्देश्य से बनने वाला यह स्टॉप डेम भविष्य में ग्रामीणों और किसानों के लिए उपयोगी साबित होना चाहिए, लेकिन वर्तमान निर्माण कार्य को देखकर लोगों में असंतोष और नाराजगी है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते निर्माण गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो शासकीय राशि का दुरुपयोग होगा और डेम टिकाऊ नहीं रह पाएगा।

मामले को लेकर जब ग्राम पंचायत कसौंदा के सरपंच जितेंद्र चंद्राकर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लेने से बचते हुए ठेकेदार और जनपद पंचायत से जानकारी लेने की बात कही। सरपंच ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और ठेकेदार ठाकुर राम चंद्राकर या जनपद कार्यालय से बात की जाए। जबकि पंचायत स्तर पर होने वाले इस प्रकार के निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी नियमानुसार ग्राम पंचायत की मानी जाती है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय निर्माण कार्य स्थल पर कार्य का नाम, स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी और कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जल संरक्षण योजना के नाम पर निर्माण कार्य में कमीशनखोरी की जा रही है और सरपंच ने अपने करीबी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम दिया है। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो निर्माण कार्य में अनियमितता के कारण शासन को आर्थिक नुकसान होगा और जनता को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।