टीवी बनाम अखबार: रायपुर प्रेस क्लब में उमेश चतुर्वेदी और जयप्रकाश मिश्रा के अनुभव स्लग

रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित बैठक में प्रसार भारती के सलाहकार उमेश चतुर्वेदी और संपादक जयप्रकाश मिश्रा ने टीवी और अखबार की पत्रकारिता के बीच के अंतर और बदलते दौर की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। कीवर्ड्स

Jan 26, 2026 - 10:20
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टीवी बनाम अखबार: रायपुर प्रेस क्लब में उमेश चतुर्वेदी और जयप्रकाश मिश्रा के अनुभव स्लग

UNITED NEWS OF ASIA.अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | प्रेस क्लब में आयोजित एक विशेष बैठक में पत्रकारिता जगत के दो बड़े दिग्गजों, प्रसार भारती के सलाहकार उमेश चतुर्वेदी और 'स्वदेश' के संपादक जयप्रकाश मिश्रा ने अपने अनुभव साझा किए। इस चर्चा का मुख्य विषय टीवी और अखबार की पत्रकारिता के बीच का बुनियादी अंतर और आज के दौर में पत्रकारों के सामने खड़ी चुनौतियां रहा।

टीवी और सोशल मीडिया: तेज रफ्तार और अल्पकालिक स्मृति उमेश चतुर्वेदी ने आज के डिजिटल युग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि टीवी और सोशल मीडिया पर समाचार बहुत तेजी से फैलते हैं, लेकिन उनकी उम्र बहुत कम होती है। उन्होंने बताया कि टीवी पर 'ब्रेकिंग न्यूज' के नाम पर अक्सर विज्ञापनों का कब्जा रहता है, जिससे वास्तविक खबर का असर कम हो जाता है। लोग टीवी पर खबर देखते हैं और कुछ ही समय में उसे भूल जाते हैं, जबकि अखबार की खबरों को लोग भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखते हैं।

अखबार का महत्व और स्थायित्व अखबार की पत्रकारिता को अधिक गहरा और भरोसेमंद बताते हुए चतुर्वेदी जी ने कहा कि प्रिंट मीडिया में खबरों का रिकॉर्ड रहता है। उन्होंने पत्रकारों को विशेष सलाह दी कि वे समाचार की 'हेडिंग' और 'वन-लाइनर' पर अधिक ध्यान दें, क्योंकि यही पाठकों को आकर्षित करने का सबसे प्रभावी जरिया है।

पत्रकारिता का बदलता स्वरूप चर्चा के दौरान पुराने और नए युग की पत्रकारिता की तुलना भी की गई। जहाँ पुराने समय में खबरों की तह तक जाने और उनकी जांच पर अधिक जोर दिया जाता था, वहीं आज के दौर में वायरल खबरें और त्वरित जानकारी प्राथमिकता बन गई हैं। संपादक जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को सचेत करने का एक गंभीर उत्तरदायित्व है। उन्होंने नए पत्रकारों को सतही जानकारी और अफवाहों से बचने की सलाह दी।

निष्कर्ष इस सत्र ने यह स्पष्ट किया कि माध्यम चाहे जो भी हो, पत्रकारिता की आत्मा 'विश्वसनीयता' में ही बसती है। अंत में, प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। यह आयोजन न केवल अनुभवी चर्चा का केंद्र रहा, बल्कि युवा पत्रकारों के लिए एक पाठशाला की तरह था।