मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज को मिला प्रशासनिक नेतृत्व: डॉ. रंजना सिंह आर्या बनीं अधिष्ठाता, डॉ. अरूणेश सिंह को अधीक्षक का प्रभार
एमसीबी जिले के नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ के सुचारू संचालन के लिए डॉ. रंजना सिंह आर्या को अधिष्ठाता और डॉ. अरूणेश सिंह को अस्पताल अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पटका, कोरिया | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB): मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के विशेष प्रयासों से नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ के स्थापना कार्य में तेजी आई है। महाविद्यालय के प्रभावी संचालन हेतु शासन ने अनुभवी चिकित्सा शिक्षकों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
वरिष्ठ चिकित्सकों को मिला दायित्व
छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नवीन कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की गई है:
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डॉ. रंजना सिंह आर्या (अधिष्ठाता): वर्तमान में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर में संचालक सह प्राध्यापक डॉ. रंजना सिंह आर्या को मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता (Dean) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
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डॉ. अरूणेश सिंह (अस्पताल अधीक्षक): अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. अरूणेश सिंह को मनेन्द्रगढ़ महाविद्यालय एवं संबद्ध अस्पताल के अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दोनों अधिकारियों ने 24 जनवरी 2026 को अपना पदभार ग्रहण कर लिया है।
क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि इस वनांचल क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य क्रांति के रूप में देखी जा रही है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार होंगे:
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बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: स्थानीय नागरिकों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
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शिक्षा के अवसर: क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही डॉक्टरी की पढ़ाई करने का अवसर प्राप्त होगा।
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आर्थिक विकास: मेडिकल कॉलेज की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे।
शासन की दूरदर्शी पहल
राज्य शासन का यह निर्णय आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से प्रभावी रहेगा, ताकि कॉलेज के प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा न आए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे मनेन्द्रगढ़ अंचल की नई पहचान के रूप में सराहा है।