भाजपा का तीखा कटाक्ष : 99 चुनाव हारने का 'कीर्तिमान' रचने वाले राहुल छत्तीसगढ़ के कांग्रेसियों को क्या सिखाएंगे?
भाजपा ने कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रशिक्षण शिविर और राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे पर निशाना साधते हुए कहा है कि लगातार चुनावी पराजयों का सामना करने वाला नेतृत्व कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र नहीं दे सकता। प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को विफलताओं की ट्रेनिंग करार दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रशिक्षण शिविर और उसमें शामिल होने के लिए राहुल गांधी के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस नेता के नाम पर चुनावी हारों का लंबा रिकॉर्ड दर्ज हो, वह कार्यकर्ताओं को जीत का पाठ कैसे पढ़ा सकता है।
देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को मजबूत करने का कार्यक्रम कम और चुनावी विफलताओं की समीक्षा का मंच अधिक प्रतीत होता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने प्रशिक्षण एजेंडे में एक नया विषय शामिल करना चाहिए—“लगातार चुनाव कैसे हारे जाएं?” उनके अनुसार इस विषय पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सबसे उपयुक्त वक्ता हो सकते हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में कांग्रेस को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का मूल्यांकन करते हुए सत्ता परिवर्तन का फैसला किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, कुशासन और संगठनात्मक कमजोरी के कारण कांग्रेस को जनता ने नकार दिया। ऐसे में वही नेतृत्व अब जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन देने का दावा कर रहा है, जिसे जनता पहले ही अस्वीकार कर चुकी है।
देवलाल ठाकुर ने राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है और पार्टी का नेतृत्व जनता का विश्वास दोबारा हासिल करने में सफल नहीं हो पाया है। ऐसे हालात में छत्तीसगढ़ में आयोजित प्रशिक्षण शिविर से कांग्रेस को कोई बड़ा राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना नहीं दिखती।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी, अति-आत्मविश्वास और रणनीतिक विफलताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। भाजपा का दावा है कि चुनावी पराजयों से सबक लेने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व अब भी आत्ममंथन की जगह प्रतीकात्मक आयोजनों पर जोर दे रहा है। ऐसे प्रशिक्षण शिविरों से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन जनता के बीच खोई हुई साख केवल कार्यक्रमों और भाषणों से वापस नहीं लाई जा सकती।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस को सबसे पहले अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमियों का ईमानदारी से विश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ की जनता विकास, सुशासन और जवाबदेही के मुद्दों पर अपना निर्णय दे चुकी है। ऐसे में प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से चुनावी हार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास सफल नहीं होगा।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस चाहे कितने भी प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर ले, लेकिन जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करने के लिए उसे जमीन पर विश्वसनीयता साबित करनी होगी। देवलाल ठाकुर ने कहा कि जनता के फैसले को स्वीकार कर आत्मचिंतन करने के बजाय यदि कांग्रेस केवल राजनीतिक संदेश देने तक सीमित रहती है, तो ऐसे शिविर उसके लिए अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाएंगे।