फर्जी डिग्री और नौकरी दिलाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड सुनील प्रताप गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी और फर्जी मेडिकल डिग्री दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। मामले में मास्टरमाइंड सुनील प्रताप सहित अब तक 6 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

Apr 8, 2026 - 18:53
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फर्जी डिग्री और नौकरी दिलाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड सुनील प्रताप गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर रायपुर। रायपुर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए फर्जी मेडिकल डिग्री और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पोस्ट ऑफिस में नौकरी दिलाने और प्रतिष्ठित संस्थानों से फर्जी एमबीबीएस एवं बीएएमएस की डिग्री बनवाने का झांसा देकर लोगों से बड़ी रकम वसूलता था। इस पूरे मामले में करीब 2 करोड़ 34 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।

मामले की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को हुई, जब प्रार्थी संजय निराला ने थाना सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे सहित अन्य लोगों ने उन्हें और उनके रिश्तेदारों को नौकरी और फर्जी प्रमाण पत्र दिलाने का झांसा देकर बड़ी रकम ऐंठ ली, लेकिन न तो नौकरी मिली और न ही कोई वैध दस्तावेज।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे, साक्षी सिंह और अंकित तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी साक्षी सिंह से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए। इसके आधार पर पुलिस को नई दिल्ली निवासी सुनील प्रताप के बारे में जानकारी मिली, जो इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

पुलिस टीम ने दिल्ली में दबिश देकर सुनील प्रताप को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह डी. वाई. पाटिल विद्यापीठ, पुणे के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस की डिग्रियां तैयार कर लोगों को देता था। आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन और कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह अब तक विभिन्न राज्यों के 30 से अधिक लोगों को फर्जी मेडिकल डिग्री उपलब्ध करा चुका है। यह मामला न केवल आर्थिक ठगी का है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर लोगों को फंसाया जाता था। फिलहाल पुलिस इस मामले में अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रयास जारी हैं।

यह कार्रवाई रायपुर पुलिस की सतर्कता और साइबर एवं आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाती है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नौकरी या डिग्री के नाम पर किसी भी प्रकार के प्रलोभन में न आएं और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।