किसान परिवार के बेटे संजू मरकाम का बीएसएफ में चयन, कोण्डागांव जिले का नाम किया रोशन

कोण्डागांव जिले के ग्राम खड़का निवासी किसान पुत्र संजू मरकाम ने एसएससी जीडी परीक्षा 2024-25 के माध्यम से बीएसएफ में चयनित होकर जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता निःशुल्क लक्ष्य कोचिंग संस्थान, कठिन परिश्रम और पारिवारिक सहयोग का परिणाम है।

Jan 21, 2026 - 17:05
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किसान परिवार के बेटे संजू मरकाम का बीएसएफ में चयन, कोण्डागांव जिले का नाम किया रोशन

UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोण्डागांव। कोण्डागांव जिले के ग्राम खड़का निवासी संजू मरकाम ने वर्ष 2024-25 की एसएससी जीडी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में चयनित होकर पूरे जिले का मान बढ़ाया है। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले संजू की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि जिले के युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है।

संजू मरकाम के माता-पिता भले ही औपचारिक रूप से शिक्षित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। संजू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी की और इसके बाद अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) विषय में स्नातकोत्तर (एमए) तक की पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ वे खेती-किसानी में भी अपने पिता का हाथ बंटाते रहे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके मन में देशसेवा का सपना हमेशा जीवित रहा।

संजू बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही वर्दी के प्रति विशेष आकर्षण था। जब भी वे किसी वर्दीधारी जवान को देखते थे, तो उनके जैसा बनने की प्रेरणा मिलती थी। इसी लक्ष्य को सामने रखकर उन्होंने एसएससी जीडी की तैयारी शुरू की।

अपनी सफलता का श्रेय संजू जिला प्रशासन द्वारा संचालित निःशुल्क ‘लक्ष्य कोचिंग संस्थान’ को देते हैं। वे लक्ष्य कोचिंग के पहले बैच के छात्र रहे हैं और प्रवेश परीक्षा में उन्होंने 19वां स्थान प्राप्त किया था। कोचिंग ज्वाइन करने के बाद उन्होंने अनुशासन, निरंतर अभ्यास और कठिन मेहनत के साथ पढ़ाई की।

संजू का कहना है कि लक्ष्य कोचिंग संस्थान जिले के युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। पहले युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रायपुर या बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग लेनी पड़ती थी, लेकिन अब जिले में ही निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध हो रहा है। संस्थान के शिक्षक प्रत्येक विषय को सरल और गहराई से समझाते हैं, जिससे तैयारी मजबूत होती है।

उन्होंने बताया कि वे रोज सुबह नियमित रूप से दौड़ लगाते थे और शारीरिक व मानसिक फिटनेस पर विशेष ध्यान देते थे। उनकी दीदी और बड़े भाई ने समय प्रबंधन और अनुशासन का महत्व समझाया, जिससे उनकी तैयारी और बेहतर हुई। आज संजू का सपना साकार हो चुका है। उनकी सफलता जिले के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।