पुलिस के अनुसार मुरता निवासी खोरबहरा साहू द्वारा इस मामले की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 30 जून 2022 से 31 मार्च 2023 के बीच सेवा सहकारी समिति मर्यादित मुरता के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक राजेन्द्र पाण्डेय और समिति के लिपिक अमित साहू ने आपसी मिलीभगत कर किसानों के साथ धोखाधड़ी की और शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए कुल 57,01,454.40 रुपये का गबन किया।
शिकायत प्राप्त होने के बाद नवागढ़ थाना पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 467, 468, 471, 409 एवं 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विस्तृत विवेचना शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देश पर विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम ने दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। जांच के दौरान पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद पुलिस ने 14 जुलाई 2026 को आरोपी राजेन्द्र पाण्डेय को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला किसानों से जुड़े सहकारी संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और शासकीय योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे किसानों के हितों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को आवश्यक माना जा रहा है।
इस पूरी कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश यादव और एसडीओपी भूषण एक्का के मार्गदर्शन में नवागढ़ थाना पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थाना प्रभारी के नेतृत्व में उप निरीक्षक भुनेश्वर यादव, सहायक उप निरीक्षक कृष्ण कुमार, प्रधान आरक्षक गोपाल ध्रुव तथा थाना नवागढ़ के अन्य पुलिसकर्मियों ने जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।