सुशासन तिहार में दिखा अपनापन: एक माह के नवजात का मुख्यमंत्री ने किया नामकरण, “रविशंकर” नाम से गूंजा गांव का आंगन

कवर्धा के बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने एक माह के नवजात शिशु का नाम “रविशंकर” रखा। चौपाल के इस भावनात्मक पल ने शासन और जनता के बीच के आत्मीय संबंध को और मजबूत किया।

May 4, 2026 - 18:13
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सुशासन तिहार में दिखा अपनापन: एक माह के नवजात का मुख्यमंत्री ने किया नामकरण, “रविशंकर” नाम से गूंजा गांव का आंगन

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | सुशासन तिहार के अंतर्गत कबीरधाम जिले के बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में एक ऐसा आत्मीय और भावनात्मक क्षण देखने को मिला, जिसने शासन और आमजन के बीच के रिश्ते को और गहरा कर दिया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जब गांव पहुंचे, तो आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर उन्होंने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई।

इस दौरान वहां का माहौल पूरी तरह अपनत्व, विश्वास और सहज संवाद से भर गया। ऐसा लगा जैसे शासन और जनता के बीच की दूरी इस एक चौपाल में पूरी तरह समाप्त हो गई हो।

इसी बीच ग्राम की निवासी ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं। उन्होंने अत्यंत विनम्रता के साथ अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण अनुरोध था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी और विश्वास की गहराई साफ झलक रही थी।

मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया। उन्होंने बच्चे के जन्म दिवस के बारे में पूछा। जब यह बताया गया कि बालक का जन्म रविवार को हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उसका नाम “रविशंकर” रखा।

नामकरण का यह क्षण वहां मौजूद सभी ग्रामीणों के लिए बेहद खास बन गया। जैसे ही नाम की घोषणा हुई, पूरा चौपाल तालियों की गूंज से भर गया और माहौल उत्सव जैसा हो गया। इस दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा भी मौजूद रहीं।

यह घटना केवल एक नामकरण नहीं थी, बल्कि यह जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच गहरे विश्वास और जुड़ाव का प्रतीक बन गई। इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की भावना को और अधिक मजबूत किया—जहां शासन केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के हर सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है।

मुख्यमंत्री साय का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का असली अर्थ लोगों से जुड़ना, उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।