भालू के हमले में घायल युवक को नई जिंदगी: 5 घंटे की सफल सर्जरी से बची जान
मनेंद्रगढ़ में भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल युवक की 5 घंटे लंबी सर्जरी कर डॉक्टरों ने उसकी जान बचाई। स्थानीय 220 बिस्तर अस्पताल में ही सफल उपचार कर स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी मिसाल पेश की गई।
UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, मनेंद्रगढ़/एमसीबी | जिले के केल्हारी विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिहुली में भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए 38 वर्षीय युवक की जान मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तर सिविल अस्पताल में 5 घंटे तक चले सफल ऑपरेशन के बाद बचा ली गई। यह घटना न सिर्फ एक जीवन बचाने की कहानी है, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती का भी बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, 28 अप्रैल की सुबह करीब 6:30 बजे युवक तिग्गा घर के पास जंगल किनारे गया हुआ था, तभी अचानक एक भालू ने उस पर हमला कर दिया। हमले में युवक बुरी तरह घायल हो गया।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने तुरंत उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केल्हारी पहुंचाया, जहां प्रारंभिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए 220 बिस्तर सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ रेफर किया गया।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने पहले मरीज को स्थिर किया और फिर जटिल सर्जरी की तैयारी शुरू की। करीब 5 घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इस सर्जरी में Dr. Alekh Sidar और Dr. Intzar Orke ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं सहयोगी टीम में अभिषेक, निशा सिस्टर और प्रियंका सिस्टर शामिल रहीं, जबकि समन्वय का कार्य मिसेज पुष्पा सिस्टर ने संभाला।
गौरतलब है कि मनेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल का हाल ही में 220 बिस्तर में उन्नयन किया गया है। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बाहर रेफर करने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही सफल इलाज कर डॉक्टरों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की।
सीएमएचओ Dr. Avinash Khare के नेतृत्व और अस्पताल अधीक्षक Dr. Swapnil Tiwari के कुशल प्रबंधन में यह सफलता संभव हो सकी।
इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य मंत्री Shyam Bihari Jaiswal ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से लोगों का भरोसा बढ़ रहा है और सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
अस्पताल अधीक्षक ने यह भी जानकारी दी कि 220 बिस्तर अस्पताल में इंडोस्कोपी यूनिट भी तैयार हो चुकी है, जिससे क्षेत्र के लोगों को आधुनिक जांच और उपचार की सुविधा अब स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी।
इधर, प्रशासन ने जंगल से लगे क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों से सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर न जाने की अपील की है।
यह पूरी घटना जहां एक ओर खतरे और संघर्ष की कहानी है, वहीं दूसरी ओर समय पर इलाज और डॉक्टरों की मेहनत से मिली नई जिंदगी की मिसाल भी है।