स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग जीवन में ऊर्जा, संतुलन और सम्मान का आधार: उपराष्ट्रपति
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने योग को स्वस्थ और सम्मानजनक बुढ़ापे का आधार बताया। उन्होंने कहा कि योग शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन प्रदान कर वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय, आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने “स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए योग एक प्रभावी और वैज्ञानिक माध्यम बनकर उभरा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति में योग का विशेष स्थान रहा है। योग की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है और आज यह पूरी दुनिया में स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्वपूर्ण साधन के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन विश्व स्तर पर किया जा रहा है, जिसके माध्यम से भारत की यह प्राचीन धरोहर वैश्विक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम “योगा फॉर हेल्दी एजिंग” वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप है। चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण लोगों की औसत आयु बढ़ी है। ऐसे में केवल लंबा जीवन ही नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। योग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
लेख में बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक भारत में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति की आयु 60 वर्ष से अधिक होगी। ऐसे परिदृश्य में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सामाजिक सहभागिता को बनाए रखने के लिए योग एक प्रभावी उपाय साबित हो सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी योग के लाभों की पुष्टि कर रहे हैं। नियमित योगाभ्यास से शरीर का संतुलन, लचीलापन और गतिशीलता बेहतर होती है। इससे गिरने की आशंका कम होती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, रक्तचाप नियंत्रित रहता है तथा मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। ध्यान और प्राणायाम से तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि योग केवल शारीरिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक संतुलन और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। वर्तमान समय में वरिष्ठ नागरिकों के बीच बढ़ते अकेलेपन की समस्या को कम करने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सामूहिक योगाभ्यास लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है और सकारात्मक सोच विकसित करता है।
उपराष्ट्रपति ने नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से योग को जीवनभर की आदत के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसा समाज ही वास्तव में समृद्ध माना जाएगा जो अपने वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करे। योग इस दिशा में एक प्रभावी और स्थायी समाधान बन सकता है।