जल शक्ति से विकसित भारत को मिल रही नई गति, जल सुरक्षा बनी राष्ट्रीय प्राथमिकता
: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में जल क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों ने भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी है। जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और नमामि गंगे जैसी पहलें जल सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत कर रही हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा है कि जल सुरक्षा आज विकसित भारत की आधारशिला बन चुकी है और पिछले 12 वर्षों में जल क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व कार्यों ने देश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और नमामि गंगे जैसी योजनाएं केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सशक्त माध्यम बनकर उभरी हैं।
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम है। मिशन की शुरुआत के समय देश के केवल लगभग 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचता था, जबकि आज 15.8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को यह सुविधा मिल चुकी है। इससे महिलाओं और बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। घर-घर जल पहुंचने से प्रतिदिन करोड़ों व्यक्ति-घंटों की बचत हो रही है, जिसका उपयोग अब शिक्षा, रोजगार और अन्य उत्पादक कार्यों में किया जा रहा है।
पाटिल ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण भारत में स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप दिया है। इस अभियान ने खुले में शौच की समस्या को कम करने के साथ महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और निजता प्रदान की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार इस अभियान के कारण लाखों लोगों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ और दस्त जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने बताया कि जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के क्षेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। “जल संचय जन भागीदारी” अभियान के अंतर्गत देशभर में करोड़ों वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम भूजल स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देने लगे हैं। जिन क्षेत्रों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा था, वहां भी स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है।
लेख में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का भी उल्लेख किया गया है, जिसे देश की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना बताया गया है। यह परियोजना बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही राज्यों के भीतर भी कई नदी जोड़ो परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
नमामि गंगे कार्यक्रम को पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलित मॉडल के रूप में प्रस्तुत करते हुए पाटिल ने कहा कि गंगा नदी की स्वच्छता और पुनर्जीवन के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। सीवेज शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा प्रदूषण के स्तर में कमी दर्ज की गई है। गंगा में डॉल्फिन की बढ़ती संख्या नदी के बेहतर होते पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संकेत है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि उसके पास विश्व के कुल मीठे जल संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में जल का कुशल प्रबंधन, संरक्षण, पुनर्चक्रण और जनभागीदारी भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में जल शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में तकनीक, नवाचार तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।