निजी स्कूलों की मनमानी पर विकास तिवारी का हमला, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

निजी स्कूलों में महंगी किताबों, कथित फर्जी मान्यता और नियमों के उल्लंघन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी नियमों के सख्त पालन की मांग की।

May 9, 2026 - 12:38
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निजी स्कूलों की मनमानी पर विकास तिवारी का हमला, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली, महंगी किताबों की बिक्री और कथित नियम उल्लंघनों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन और उसके अध्यक्ष राजीव गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों के सख्त पालन की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि निजी स्कूल संचालकों को स्कूल संचालन में परेशानी हो रही है तो वे सरकार को इसकी सूचना देकर अन्य व्यवसाय अपनाएं।

विकास तिवारी ने प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा को व्यवसाय की तरह संचालित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में महंगी निजी किताबें जबरन बेची जा रही हैं और कुछ संस्थान बिना मान्यता के भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में फर्जी सीबीएसई स्कूलों और बिना मान्यता वाले प्ले तथा नर्सरी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने हाईकोर्ट में लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। विकास तिवारी ने खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई पक्ष अदालत के आदेशों को लेकर अलग राय रखता है तो वह सार्वजनिक रूप से चर्चा के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़े मामलों में सरकार और न्यायालय के निर्देशों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।

विकास तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल संचालक राज्य सरकार की नीतियों और पाठ्यपुस्तक व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी पाठ्यपुस्तकों को लेकर सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक टिप्पणी की गई, जो शिक्षा व्यवस्था और राज्य सरकार दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी निजी स्कूल संचालकों के साथ मिलकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे आम लोगों में गलत संदेश जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीजी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों को ही लागू किया जाना चाहिए और फीस भी उसी अनुरूप निर्धारित होनी चाहिए। वहीं सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों का उपयोग अनिवार्य किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजी स्कूल मनमानी तरीके से महंगी निजी किताबें बेचते पाए गए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

विकास तिवारी ने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, न कि मुनाफाखोरी का व्यवसाय। उन्होंने मांग की कि सरकार निजी स्कूलों की मान्यता, फीस संरचना और पुस्तक बिक्री व्यवस्था की नियमित जांच कराए। साथ ही उन्होंने अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।

इस बयान के बाद शिक्षा जगत में बहस तेज हो गई है। निजी स्कूल संगठन और शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि यह मुद्दा राज्य में शिक्षा व्यवस्था, निजी स्कूलों की जवाबदेही और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है।