धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर विधायक भावना बोहरा का ओजस्वी भाषण, आदिवासी अस्मिता की रक्षा का बताया ‘महाकाव्य’

छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने जोरदार भाषण देते हुए इसे आदिवासी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा का ऐतिहासिक कदम बताया।

Mar 20, 2026 - 12:03
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धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर विधायक भावना बोहरा का ओजस्वी भाषण, आदिवासी अस्मिता की रक्षा का बताया ‘महाकाव्य’

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर हुई चर्चा के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने अपने ओजस्वी और प्रभावशाली भाषण से सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इस विधेयक को आदिवासी समाज की मूल जड़ों, उनकी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा का “महाकाव्य” बताते हुए इसका जोरदार समर्थन किया।

चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल एक सामान्य प्रशासनिक पहल नहीं है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक और युग-परिवर्तक कदम है। उन्होंने इसका श्रेय राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दृढ़ संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विजन को दिया। उन्होंने कहा कि यह “डबल इंजन सरकार” का ऐसा मजबूत कदम है, जो समाज की जड़ों को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ प्रभावी साबित होगा।

भावना बोहरा ने अपने भाषण में आदिवासी समाज से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के कुल्हीडोंगरी, नेऊर और कुई-कुकदुर जैसे क्षेत्रों में उन्होंने 400 से अधिक आदिवासी लोगों की ‘घर वापसी’ कराई है। इस दौरान उन्हें जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, उसे भी उन्होंने सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि इन लोगों का धर्मांतरण किसी आस्था के कारण नहीं, बल्कि गरीबी, बीमारी और संसाधनों की कमी का परिणाम था।

उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि जब वे आदिवासी परिवारों के पैर पखारकर उनकी घर वापसी कराती हैं, तो उनकी आंखों में जो आंसू होते हैं, वे अपने मूल धर्म और परंपरा से पुनः जुड़ने की खुशी के होते हैं। उन्होंने धर्मांतरण की तुलना पेड़ की शाखा को काटकर दूसरी जगह लगाने से करते हुए कहा कि “घर वापसी” उस शाखा को उसकी मूल जड़ों से जोड़ने जैसा है।

विधेयक के प्रावधानों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज धर्मांतरण का स्वरूप बदल चुका है और यह डिजिटल माध्यमों के जरिए भी किया जा रहा है। उन्होंने धारा 2(च) और धारा 3 में डिजिटल माध्यमों को अपराध की श्रेणी में शामिल किए जाने को विधेयक की बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही धारा 14 के तहत ‘घर वापसी’ को कानूनी मान्यता मिलने को सनातन संस्कृति की बड़ी जीत करार दिया।

उन्होंने धारा 16 में महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जनजातियों के मामलों में कड़े दंड प्रावधानों—20 वर्ष तक की सजा और सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तथा भारी जुर्माने—को भी सराहा। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों की तरह अंधविश्वास और जादू-टोना से जुड़े मामलों को भी कानून में शामिल किया जाए।

अंत में उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि दंडकारण्य की पवित्र भूमि पर खींची गई एक “लक्ष्मण रेखा” है, जो समाज की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करेगी।

इसके अलावा, प्रश्नकाल के दौरान विधायक भावना बोहरा ने अपने क्षेत्र पंडरिया में औद्योगिक विकास, मनरेगा कार्यों, महिला स्व-सहायता समूहों को ऋण और महतारी सदन की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए।