कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। छोटे-छोटे बच्चों ने गीत, नृत्य और पारंपरिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
मुख्य अतिथियों ने अपने संबोधन में बताया कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास से होती है, जो हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को नया साल मनाते हैं, लेकिन भारतीय परंपरा में वास्तविक नववर्ष की शुरुआत इसी दिन से होती है। इस अवसर पर बच्चों को अपनी जड़ों से जुड़ने और भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने बच्चों को खीर खिलाकर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। इस पहल ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया और बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। पूरा वातावरण उल्लास और भक्ति भाव से सराबोर रहा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शुश्री साधवी रुकमणी दीदी उपस्थित रहीं। उनके साथ पूर्व बीडीसी मुन्ना गुप्ता, धर्मवीर सिंह, विजय सिंह सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और ग्रामीणजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने मिलकर इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और समाज में अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ते हैं।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के संचालक युगल किशोर सिंह, आशीष सिंह, शुश्री शकुंतला सिंह और शुश्री जितवंती सिंह का विशेष योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और आकर्षक रूप दिया गया।
कुल मिलाकर यह आयोजन न केवल एक उत्सव रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।