नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास और पुनर्वास को लेकर सरकार गंभीर नहीं: दीपक बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और पुनर्वास योजनाओं को लेकर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के दावे खोखले हैं और आदिवासी क्षेत्रों में संसाधनों की लूट हो रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास एवं पुनर्वास योजनाओं को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रायपुर में जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों के वास्तविक विकास के प्रति गंभीर नहीं है और उसका पूरा फोकस केवल छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर केंद्रित है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई और जबरन नए खदान खोलने का विरोध करने वाले आदिवासियों को या तो जेल भेजा जा रहा है या फिर उन्हें हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर नक्सली हिंसा से पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आत्मसमर्पित नक्सली पुनर्वास योजनाओं के लाभ के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वादा किया था कि जो भी गांव नक्सल मुक्त होगा, उसे विकास के लिए एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। दीपक बैज ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि बस्तर के कितने गांवों को अब तक इस योजना के तहत एक-एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उत्तर बस्तर और नारायणपुर जिलों को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने का दावा किया गया, लेकिन आज तक इसका कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। सरकार द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों में 2386 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इनमें से कितनों को पुनर्वास नीति के तहत नौकरी, जमीन और आवास जैसी सुविधाएं वास्तव में मिली हैं।
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बस्तर के 582 गांव नक्सल मुक्त हुए थे। उस दौरान नक्सली घटनाओं में 64 प्रतिशत और सुरक्षा बलों की शहादत में 80 प्रतिशत तक की कमी आई थी। सैकड़ों किलोमीटर सड़कें, पुल-पुलिया, मोबाइल टावर और सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए थे, जिससे विकास, विश्वास और सुरक्षा का माहौल बना।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार में आदिवासियों का उत्पीड़न हो रहा है, पेसा कानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार से जुड़े कार्य ठप पड़े हैं। कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के कारण पूरे बस्तर संभाग में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश का माहौल है।