मछली पालन से टेमरी गांव में विकास की नई राह, बढ़ रही ग्रामीणों की आय

बेमेतरा जिले के टेमरी गांव में संगठित मत्स्य पालन के जरिए ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो रही है। 7 हेक्टेयर जलक्षेत्र में संचालित इस पहल से गांव आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

Mar 22, 2026 - 14:07
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मछली पालन से टेमरी गांव में विकास की नई राह, बढ़ रही ग्रामीणों की आय

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा। बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायत टेमरी में मछली पालन ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह बनकर उभर रहा है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका द्वारा गोद लिए गए इस गांव में अब संगठित मत्स्य पालन के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है।

मछली पालन विभाग के मार्गदर्शन में गांव के छछुंदिया, दर्री और लोहरी तालाबों में संगठित रूप से मत्स्य पालन किया जा रहा है। इन तीनों तालाबों का कुल जलक्षेत्र लगभग 7.020 हेक्टेयर है, जहां स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से उत्पादन किया जा रहा है।

इन तालाबों को दीर्घकालीन पट्टे पर स्थानीय समूहों को सौंपा गया है, जिससे ग्रामीणों को स्थायी रोजगार के अवसर मिले हैं। छछुंदिया तालाब (2.060 हेक्टेयर) और लोहरी तालाब (1.48 हेक्टेयर) स्वयं सहायता समूहों को, जबकि दर्री तालाब (3.48 हेक्टेयर) सहकारी समिति को दिया गया है। इससे गांव में आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।

शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत जाल, दवाइयों और मछली बीज के लिए अनुदान भी प्रदान किया गया है। इससे ग्रामीणों में मत्स्य पालन के प्रति रुचि बढ़ी है और वे इसे प्रमुख आय स्रोत के रूप में अपनाने लगे हैं।

साथ ही विभाग द्वारा सर्वे और प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है और गांव आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। साथ ही अन्य खाली तालाबों को भी पट्टे पर देने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिल सके।

मछली पालन योजनाओं का लाभ मिलने से टेमरी गांव में न केवल ग्रामीणों की आय बढ़ रही है, बल्कि गांव के समग्र विकास को भी नई गति मिल रही है।