स्कूलों में मंत्र पाठ को लेकर विवाद, मनीष कुंजाम ने सरकार के फैसले का किया विरोध

सुकमा में पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने सरकारी स्कूलों में मंत्र और वंदनाओं के पाठ को लेकर प्रदेश सरकार के निर्णय का विरोध किया। उन्होंने इसे संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत बताते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है।

Jun 18, 2026 - 17:21
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स्कूलों में मंत्र पाठ को लेकर विवाद, मनीष कुंजाम ने सरकार के फैसले का किया विरोध

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी, सुकमा l प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के साथ छात्रों से विभिन्न मंत्रों और वंदनाओं का पाठ कराए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सुकमा में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक एवं बस्तरिया राज मोर्चा के संस्थापक मनीष कुंजाम ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए प्रदेश सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान मनीष कुंजाम ने कहा कि स्कूलों के लिए जारी नए शेड्यूल के अनुसार विद्यार्थियों को सुबह की प्रार्थना से लेकर छुट्टी तक विभिन्न अवसरों पर कई प्रकार के मंत्रों और वंदनाओं का पाठ कराना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इसमें राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, महापुरुषों की जीवनी का वाचन, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

कुंजाम का कहना है कि इस व्यवस्था से शिक्षकों के सामने भी व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। उनका तर्क है कि पढ़ाई के समय पर इसका प्रभाव पड़ सकता है और शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण ज्ञान उपलब्ध कराना है और विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि यह निर्णय संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत विविध धर्मों, संस्कृतियों और आस्थाओं वाला देश है, जहां सभी समुदायों को समान सम्मान प्राप्त है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को अनिवार्य रूप से शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।

मनीष कुंजाम ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की अपनी विशिष्ट परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे संरक्षित और सम्मानित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्थाएं आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित कर सकती हैं।

बस्तरिया राज मोर्चा ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव सभी वर्गों और समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। साथ ही आम नागरिकों और आदिवासी समाज से इस विषय पर जागरूक रहने और अपनी राय रखने की अपील भी की गई है।

स्कूलों में मंत्र पाठ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। एक ओर सरकार इसे सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़कर देख सकती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है।

फिलहाल इस मामले में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है।