जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सकर्रा में तीन अलग-अलग सीसी रोड का निर्माण कराया गया था। इन सभी सड़कों पर करीब 25 लाख रुपये की लागत आई थी। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद इन सड़कों की हालत खराब होने लगी। जगह-जगह दरारें, उखड़ती सतह और कमजोर संरचना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया गया और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। यही वजह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कें टिकाऊ नहीं रह पाईं। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है और जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं।
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता टिकेश्वर चंद्रा ने लगभग एक महीने पहले कलेक्टर सक्ती को लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने मांग की थी कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। हालांकि, अब तक इस शिकायत पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।
टिकेश्वर चंद्रा का आरोप है कि जनपद पंचायत मालखरौदा के सीईओ द्वारा सरपंच, सचिव और संबंधित इंजीनियर को संरक्षण दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इसी वजह से मामले की जांच में देरी हो रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। DMF फंड का उद्देश्य खनिज प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है, लेकिन यदि इस तरह से भ्रष्टाचार और लापरवाही सामने आती है, तो यह योजना के उद्देश्य को ही कमजोर करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मीडिया में मामला उजागर होने के बाद क्या प्रशासन जागेगा और इस मामले में संलिप्त अधिकारियों व जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करेगा या नहीं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, सकर्रा ग्राम पंचायत का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पर क्या कार्रवाई होती है और क्या ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है या नहीं।