मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में सीवेज चैंबर की सफाई का काम किया जा रहा था। इसी दौरान एक मजदूर सबसे पहले चैंबर के अंदर उतरा, लेकिन कुछ ही देर में वह जहरीली गैस के कारण बेहोश होकर फंस गया। उसे बचाने के लिए दो अन्य मजदूर नीचे उतरे, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए।
तीनों मजदूरों को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने घटना के बाद विरोध और हंगामा किया। सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी।
इस हादसे में मृतकों की पहचान अनमोल माझी (25 वर्ष), गोविंद सेंद्रे (35 वर्ष) और सत्यम कुमार (22 वर्ष) के रूप में हुई है। टिकरापारा थाना प्रभारी टी.आई. विनय बघेल ने तीनों की मौत की पुष्टि की है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवेज चैंबर में उतारा गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के कार्यों में गैस मास्क, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य होते हैं।
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मृत मजदूरों के शवों को अस्पताल के पिछले रास्ते से ले जाया गया, जिससे संदेह और बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों और मजदूरों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं, बल्कि पहले भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर यह मुद्दा उजागर कर दिया है कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है। यदि समय रहते उचित सुरक्षा उपाय किए जाते, तो शायद इन तीनों मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और यह देखा जा रहा है कि इस घटना में किसकी लापरवाही सामने आती है। वहीं, प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।