रायपुर में टीबी और फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण पर राज्य स्तरीय बैठक आयोजित

रायपुर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा टीबी और फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण पर राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में समय पर पहचान, प्रभावी रेफरल व्यवस्था और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एकीकृत मॉडल विकसित करने पर चर्चा हुई।

Jun 16, 2026 - 12:21
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रायपुर में टीबी और फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण पर राज्य स्तरीय बैठक आयोजित

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा टीबी और फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण को लेकर राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध स्क्रीनिंग और निदान सुविधाओं का बेहतर उपयोग कर फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान तथा उपचार व्यवस्था को मजबूत बनाना था।

कार्यक्रम का आयोजन PATH और The Bristol Myers Squibb Foundation के सहयोग से किया गया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, चिकित्सा विशेषज्ञों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों और विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने टीबी और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और समन्वित उपचार व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में राज्य क्षय अधिकारी एवं उप संचालक (एनसीडी) डॉ. संजीव मेश्राम और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायपुर डॉ. मिथलेश चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर और बिलासपुर के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

कार्यक्रम के दौरान PATH के उप निदेशक डॉ. अजय पाटले ने टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच और देखभाल सेवाओं के आकलन से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि राज्य में टीबी कार्यक्रम के तहत पहले से उपलब्ध स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक ढांचे का उपयोग फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान को मजबूत करने के लिए प्रभावी रूप से किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार टीबी और फेफड़ों के कैंसर के कई शुरुआती लक्षण समान हो सकते हैं। ऐसे में यदि दोनों बीमारियों की जांच सेवाओं को एकीकृत किया जाए तो रोगियों की समय पर पहचान संभव होगी और उन्हें जल्द उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे स्वास्थ्य प्रणाली की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी और मरीजों को अलग-अलग संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

अपने संबोधन में डॉ. संजीव मेश्राम ने कहा कि समय पर जांच, शीघ्र पहचान और प्रभावी रेफरल व्यवस्था किसी भी गंभीर बीमारी के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों और कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर टीबी और फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं को एकीकृत किया जा सकता है। इससे मरीजों को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सुझाव और अनुशंसाएं भी प्रस्तुत कीं। इन सुझावों के आधार पर छत्तीसगढ़ में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच और देखभाल सेवाओं के लिए एक प्रभावी एकीकृत मॉडल विकसित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि इस पहल से दोनों रोगों की समय पर पहचान, बेहतर उपचार प्रबंधन और मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एकीकृत जांच प्रणाली भविष्य में गंभीर बीमारियों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।