Monsoon Car Care: बारिश में सही टायर प्रेशर ही बनाएगा सफर सुरक्षित, जानिए जरूरी टिप्स

बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए कार के टायरों में हमेशा कंपनी द्वारा निर्धारित प्रेशर ही रखना चाहिए। ज्यादा या कम हवा दोनों ही दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। सही टायर प्रेशर के साथ ट्रेड डेप्थ और नियमित जांच भी बेहद जरूरी है।

Jul 31, 2026 - 18:04
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Monsoon Car Care: बारिश में सही टायर प्रेशर ही बनाएगा सफर सुरक्षित, जानिए जरूरी टिप्स

UNITED NEWS OF ASIA. बारिश के मौसम में ड्राइविंग के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। जलभराव, फिसलन और खराब सड़कें वाहन चालकों के लिए चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में अधिकांश लोग कार के वाइपर्स, ब्रेक और हेडलाइट्स की जांच तो कर लेते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी टायरों की स्थिति और उनके प्रेशर पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। जबकि सड़क और वाहन के बीच सीधा संपर्क केवल टायरों का ही होता है। इसलिए मानसून में सही टायर प्रेशर बनाए रखना सुरक्षित ड्राइविंग के लिए बेहद जरूरी है।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में टायरों की हवा न तो जरूरत से ज्यादा भरनी चाहिए और न ही कम रखनी चाहिए। हमेशा वाहन निर्माता कंपनी (OEM) द्वारा निर्धारित टायर प्रेशर का ही पालन करना चाहिए। सही प्रेशर की जानकारी कार के ड्राइवर साइड दरवाजे के बी-पिलर पर लगे स्टिकर, फ्यूल लिड के अंदर या ओनर मैनुअल में आसानी से मिल जाती है। मौसम के अनुसार अपनी तरफ से टायर प्रेशर बदलना नुकसानदायक हो सकता है।

टायरों में जरूरत से ज्यादा हवा भरने पर उनका सड़क से संपर्क क्षेत्र कम हो जाता है। बारिश के दौरान सड़क पर पानी की पतली परत होने के कारण ऐसे टायर पर्याप्त ग्रिप नहीं बना पाते। परिणामस्वरूप तेज रफ्तार में ब्रेक लगाने या मोड़ काटते समय वाहन फिसलने का खतरा बढ़ जाता है।

वहीं, कई लोगों की यह धारणा होती है कि बारिश में कम हवा रखने से टायर की पकड़ मजबूत होती है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। कम हवा वाले टायरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे वे तेजी से घिसते हैं। इसके अलावा इंजन पर भी अधिक भार पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। लंबे सफर के दौरान ऐसे टायर ज्यादा गर्म होकर फट भी सकते हैं।

सुरक्षित ड्राइविंग के लिए केवल टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि टायरों की ट्रेड डेप्थ की जांच भी जरूरी है। टायरों पर बने खांचे सड़क पर जमा पानी को बाहर निकालने में मदद करते हैं। यदि टायर घिस चुके हों तो पानी टायर और सड़क के बीच परत बना देता है, जिससे वाहन एक्वाप्लेनिंग (Hydroplaning) का शिकार हो सकता है। इस स्थिति में स्टीयरिंग और ब्रेक पर नियंत्रण खत्म होने का खतरा रहता है। इसलिए घिसे हुए टायरों को समय रहते बदल देना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महीने में कम से कम दो बार कोल्ड टायर प्रेशर की जांच करानी चाहिए। लंबी यात्रा से पहले सभी टायरों के साथ स्टेपनी का भी प्रेशर और स्थिति अवश्य जांचें। यदि संभव हो तो टायरों में नाइट्रोजन गैस भरवाएं, क्योंकि इससे प्रेशर लंबे समय तक स्थिर रहता है और तापमान के बदलाव का असर भी कम पड़ता है।

बारिश के मौसम में सही टायर प्रेशर, बेहतर ट्रेड डेप्थ और नियमित जांच न केवल वाहन की परफॉर्मेंस बढ़ाती है, बल्कि आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है।