मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का 14वां चरण शुरू, 16.20 लाख लोगों की होगी जांच

छत्तीसगढ़ में मलेरिया मुक्त अभियान के 14वें चरण की शुरुआत 15 जून से हो गई है। बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के 2476 गांवों में 16.20 लाख लोगों की जांच की जाएगी। अभियान के तहत 2063 सर्वे दल घर-घर पहुंचकर मलेरिया की पहचान और उपचार सुनिश्चित करेंगे।

Jun 16, 2026 - 12:27
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मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का 14वां चरण शुरू, 16.20 लाख लोगों की होगी जांच

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ सरकार ने मलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 15 जून से ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 14वें चरण की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत बस्तर संभाग सहित राज्य के 10 संवेदनशील जिलों में व्यापक स्तर पर मलेरिया जांच और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य मलेरिया के संभावित मामलों की समय पर पहचान कर संक्रमित व्यक्तियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना और संक्रमण के प्रसार को रोकना है। अभियान के अंतर्गत लगभग 16.20 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अभियान बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव सहित बस्तर संभाग के सातों जिलों में संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा गरियाबंद, कबीरधाम और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के संवेदनशील क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया है। राज्य के 36 विकासखंडों के 697 उप स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 2476 गांवों में सर्वेक्षण और जांच अभियान चलाया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2015 में बस्तर संभाग का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 27.40 था, जो वर्ष 2025 में घटकर 6.98 पर पहुंच गया है। वहीं राज्य का एपीआई भी 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है। वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2025 में मलेरिया के कुल मामलों में 80 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।

जनवरी 2026 में आयोजित अभियान के 13वें चरण के परिणाम भी काफी उत्साहजनक रहे थे। उस दौरान मलेरिया धनात्मकता दर 4.60 प्रतिशत से घटकर केवल 0.48 प्रतिशत रह गई थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि घर-घर पहुंचकर जांच करने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने की रणनीति ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए राज्यभर में 2063 सर्वे दल गठित किए गए हैं। ये दल गांवों और घरों तक पहुंचकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जांच किट के माध्यम से मलेरिया परीक्षण किया जाएगा और संक्रमित पाए जाने वाले लोगों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

इस बार बच्चों और किशोरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए 4420 स्कूलों, 346 छात्रावासों, 591 आश्रमों, 77 पोटाकेबिनों और 334 अर्धसैनिक बल शिविरों में विशेष जांच और निगरानी की व्यवस्था की गई है। इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों की नियमित जांच की जाएगी ताकि संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान हो सके।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सर्वे दलों को पूरा सहयोग दें और बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं। विभाग का मानना है कि जनसहभागिता और सतत निगरानी से छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य और अधिक तेजी से हासिल किया जा सकेगा।